Monday, June 29, 2026
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ग्रामीण रोजगार योजना से सियासी हलचल, भाजपा शासित राज्यों में चर्चा तेज

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को समाप्त कर उसकी जगह 'विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम' (वीबी जी-राम जी अधिनियम) लाने के फैसले पर देश में सियासी घमासान छिड़ गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस नए कानून को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि यह नया अधिनियम ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में केंद्रीकरण को बढ़ावा देगा और राज्यों पर अत्यधिक आर्थिक दबाव बढ़ाएगा।

संसदीय प्रक्रिया की अनदेखी और जल्दबाजी का आरोप

कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा करते हुए मोदी सरकार की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने हमेशा की तरह प्रतिशोध और संकीर्ण राजनीति से प्रेरित होकर इस महत्वपूर्ण विधेयक को संसद से जबरन पारित कराया है। रमेश के अनुसार, इस कानून को अमलीजामा पहनाने से पहले ग्रामीण विकास संबंधी संसदीय स्थायी समिति, राज्य सरकारों या इस क्षेत्र से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पक्षों से कोई व्यापक विचार-विमर्श नहीं किया गया, जिससे इस योजना की जमीनी सफलता पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं।

भाजपा शासित राज्यों ने भी खोला मोर्चा

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि 1 जुलाई से लागू होने जा रही इस नई 'वीबी जी-राम जी' योजना का विरोध केवल विपक्षी दल ही नहीं, बल्कि स्वयं भाजपा और उसके सहयोगी दलों द्वारा शासित राज्य भी कर रहे हैं। उन्होंने खुलासा किया कि मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने इस नई व्यवस्था के कारण प्रांतीय सरकारों पर पड़ने वाले भारी वित्तीय बोझ का कड़ा विरोध दर्ज कराया है। कांग्रेस के अनुसार, खुद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह राज्य (मध्य प्रदेश) द्वारा जताई गई यह चिंता केंद्र सरकार की नीतियों में तालमेल की कमी को उजागर करती है।

'ब्लैकआउट अवधि' और मजदूरी पर राज्यों की आपत्ति

नए कानून के तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर सवाल उठाते हुए जयराम रमेश ने बताया कि देश के कम से कम चार राज्यों ने खेती के व्यस्त सीजन के दौरान प्रस्तावित 'ब्लैकआउट अवधि' का विरोध किया है। इस अवधि के दौरान ग्रामीण श्रमिकों को योजना के तहत काम उपलब्ध नहीं कराने का प्रावधान है, जिसे राज्य व्यावहारिक नहीं मान रहे हैं। इसके साथ ही, न्यूनतम पांच राज्यों ने ग्रामीण मजदूरों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उनकी दैनिक मजदूरी में वृद्धि करने की मांग भी केंद्र सरकार के समक्ष उठाई है।

काम के अधिकार बनाम केंद्रीकरण की बहस

विपक्ष का मानना है कि मूल मनरेगा कानून ग्रामीण आबादी को संविधान के तहत 'काम के अधिकार' की कानूनी गारंटी देता था, जिससे संकट के समय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा मिलता था। इसके विपरीत, नया 'वीबी जी-राम जी' अधिनियम केवल प्रशासनिक केंद्रीकरण और राज्यों के संघीय ढांचे पर अतिरिक्त दबाव की गारंटी साबित होने वाला है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि बिना राज्यों की सहमति और आम राय के उठाया गया यह कदम ग्रामीण भारत में रोजगार और आजीविका सुनिश्चित करने के बुनियादी उद्देश्य को पूरी तरह भटका सकता है।