नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 10 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। प्रदर्शन की अनुमति न मिलने और प्रशासन द्वारा किए गए कड़े सुरक्षा इंतजामों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
देश संसद से चलेगा, सड़क से नहीं: रवि शंकर प्रसाद
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद रवि शंकर प्रसाद ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि दिनभर चले घटनाक्रम से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत के लोकतंत्र ने अराजकता फैलाने की हर कोशिश को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह देश संसद के नियमों और माध्यम से चलेगा, न कि सड़कों पर होने वाले हंगामों से। उन्होंने हालिया चुनावी परिणामों का जिक्र करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि असम, नंदीग्राम (जहां 70 प्रतिशत से अधिक अल्पसंख्यक मतदाता हैं, वहां भी पार्टी भारी अंतर से जीती) और पुडुचेरी में एनडीए की जीत यह साबित करती है कि जनता विकास के साथ है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव हारने वाले हताश और निराश लोग अपनी राजनीतिक जमीन खो चुके हैं और उन्होंने जनता को परेशान करने के लिए सड़क के प्रदर्शन को हथियार बना लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरी कवायद में विपक्ष का कोई तालमेल नहीं है, जहां राहुल गांधी के बाद आम आदमी पार्टी की 'शैडो बॉक्सिंग' करने वाली सीजेपी और अन्य दल मैदान में उतरकर नाटक कर रहे हैं।
सरकार डरी हुई है और यह डर अच्छा है: भूपेश बघेल
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने सत्ता पक्ष के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें मिथ्या बताया। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले आंदोलनकारियों द्वारा रेल और बसें रोकी जाती थीं, लेकिन अब सरकार खुद ही चक्का जाम कर रही है। सड़कों पर कीलें बिछाई जा रही हैं, तथा मेट्रो, ट्रेन और बसों के संचालन को रोका जा रहा है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार भयभीत है और जनता की एकता के आगे उसका यह डर पूरी तरह स्वाभाविक है। उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कड़े शब्दों में कहा कि इंडिया गठबंधन, सीजेपी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार देश की संवैधानिक संस्थाओं पर सुनियोजित तरीके से कुठाराघात कर रहे हैं और देश को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया कोई पहली बार नहीं हुई है, बल्कि यह पहले भी कई बार हो चुका है, जिसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची का शुद्धिकरण करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके बावजूद यदि किसी का नाम छूट जाता है, तो फॉर्म-6 के माध्यम से नाम जुड़वाने का पूरा प्रावधान मौजूद है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का मान और विकास का मॉडल पूरी दुनिया में बढ़ा है, जिससे जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे राजनीतिक हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।
हिरासत के बीच व्यक्तिगत घटना पर अपडेट
इस बीच आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस हिरासत में मौजूद 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके को उनकी दादी के निधन की दुखद सूचना दे दी गई है। अब यह उनके व्यक्तिगत निर्णय पर निर्भर करता है कि वे हिरासत में रहते हुए अपना विरोध जारी रखना चाहते हैं या अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए वापस जाना चाहते हैं।

