ठाणे | ठाणे में गोली मारकर हत्या किए गए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता प्रदीप पूर्णेकर के बेटे ने पुलिस के सामने अपना आधिकारिक बयान दर्ज कराया है। मृतक के बेटे ने पूर्व महापौर (मेयर) मीनाक्षी शिंदे और उनके पति पर उनके पिता की हत्या की गहरी साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है। इस सनसनीखेज मामले में ठाणे पुलिस ने अब तक एक संदिग्ध हमलावर को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक अन्य को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इस खौफनाक घटना के बाद से शहर में भारी रोष व्याप्त था और जमकर विरोध-प्रदर्शन भी हुए थे।
किस पर और क्या लगाए गए गंभीर आरोप?
बुधवार के दिन ठाणे के कपूरबावड़ी पुलिस स्टेशन के बाहर शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत और युवा नेता आदित्य ठाकरे भी धरने व विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने पहुँचे थे। बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक दबाव के बाद पुलिस ने मृतक पूर्णेकर के 26 वर्षीय बेटे राम पूर्णेकर का विस्तृत बयान दर्ज किया। राम ने पुलिस को दिए अपने बयान में ठाणे की पूर्व मेयर व शिवसेना नेत्री मीनाक्षी शिंदे और उनके पति राजेंद्र शिंदे पर हत्या की साजिश रचने का सीधा आरोप लगाया है।
गौरतलब है कि मंगलवार की रात घोड़बंदर रोड के पास शिवसेना (यूबीटी) के 'विभाग प्रमुख' पर हुए इस जानलेवा हमले के बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट के तहत कुल पाँच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। नामजद आरोपियों में पूर्णेकर के पूर्व सहयोगी पाप्या शिंदे, संतोष कनौजिया उर्फ टल्ली, निखिल यादव उर्फ 'शूटर' और दो अन्य अज्ञात व्यक्ति शामिल हैं।
हत्या के पीछे की वजह और पुरानी रंजिश
राम ने पुलिस को जानकारी दी कि उसने 24 सितंबर की रात घोड़बंदर इलाके में राजेंद्र शिंदे को कनौजिया, यादव और नितेश उर्फ भावड्या पवार के साथ बेहद संदिग्ध परिस्थितियों में मिलते हुए देखा था। घर लौटने पर उसने अपने पिता को यह बात बताई थी और उनसे आग्रह किया था कि वे रात 10 बजे के बाद घर से बाहर न निकलें, क्योंकि उसे किसी अनहोनी और पिता को निशाना बनाए जाने की आशंका थी।
राम के अनुसार, ठाणे म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (नगर निगम) के चुनावों के समय से ही दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक और व्यक्तिगत दुश्मनी चली आ रही थी। इन चुनावों में मीनाक्षी शिंदे ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था, जबकि मृतक की पत्नी विजेता पूर्णेकर और उनके चाचा जयनाथ पूर्णेकर को शिवसेना (यूबीटी) ने अपना उम्मीदवार बनाया था। परिवार का आरोप है कि इसी पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, जमीन के विवाद और उनके पिता द्वारा लगातार उठाई जा रही अवैध गतिविधियों के खिलाफ आवाज के कारण पूर्व मेयर और उनके पति ने मिलकर इस खौफनाक वारदात की साजिश रची। भारी पुलिस बल की मौजूदगी और सेना (यूबीटी) के तमाम दिग्गज नेताओं व समर्थकों की उपस्थिति में बाद में पूर्णेकर का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
पुलिस प्रशासन का इस हाई-प्रोफाइल मामले पर क्या कहना है?
संयुक्त पुलिस आयुक्त (ज्वाइंट सीपी) ज्ञानेश्वर चव्हाण ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि स्थानीय पुलिस और अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) की संयुक्त टीमें इस मामले की हर पहलू से बारीकी से जाँच कर रही हैं। यह पूरी घटना रात करीब साढ़े नौ बजे कपूरबावड़ी पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले घोड़बंदर क्षेत्र में घटी थी, जब कुछ अज्ञात नकाबपोश हमलावरों ने पूर्णेकर के कार्यालय में घुसकर उन पर ताबड़तोड़ गोलियाँ चलाईं और धारदार हथियारों से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उन्हें तुरंत नजदीकी निजी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
बुधवार की दोपहर शिवसेना (यूबीटी) के सैकड़ों कार्यकर्ता, परिवार के सदस्य और आदित्य ठाकरे व संजय राउत जैसे वरिष्ठ नेता पोस्टमार्टम के बाद पूर्णेकर का शव लेकर कपूरबावड़ी पुलिस स्टेशन के बाहर जमा हो गए थे। उस दौरान संजय राउत ने पुलिस के समक्ष यह प्रमुख माँग रखी थी कि पुलिस मृतक के बेटे के बयान को पूरक प्राथमिकी (सप्लीमेंट्री एफआईआर) में शामिल करे और ठाणे की पूर्व मेयर तथा उनके पति के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कर उन्हें तुरंत गिरफ्तार करे।

