नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज लद्दाख को करीब 3,350 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं की बड़ी सौगात देंगे। यह कार्यक्रम दोपहर 12:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री इन परियोजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण करने के साथ-साथ एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। इन विकास कार्यों से केंद्र शासित प्रदेश में कनेक्टिविटी, बिजली आपूर्ति, जल संरक्षण और सांस्कृतिक संरक्षण को बड़ा बल मिलेगा।
लेह एयरपोर्ट का नया पैसेंजर टर्मिनल
प्रधानमंत्री लेह के कुशोक बकुला रिम्पोछे एयरपोर्ट के नए पैसेंजर टर्मिनल को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इसे 640 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया है। यह टर्मिनल 23,800 वर्ग मीटर में फैला है और हर साल करीब 35 लाख यात्रियों को संभालने की क्षमता रखता है। यात्रियों की सुविधा के लिए इसमें आधुनिक इंतजाम किए गए हैं, जबकि इसके निर्माण में लद्दाख की सांस्कृतिक झलक को भी शामिल किया गया है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा की खपत और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए इसमें जियोथर्मल एनर्जी का इस्तेमाल किया गया है।
रणनीतिक रूप से अहम निम्मू-पदुम-दरचा सड़क
बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) द्वारा तैयार की गई 298 किलोमीटर लंबी निम्मू-पदुम-दरचा सड़क भी देश को समर्पित की जाएगी। यह सड़क लेह के निम्मू को हिमाचल प्रदेश के दरचा से जोड़ेगी और जांस्कर घाटी से होकर गुजरेगी। इससे श्रीनगर-लेह और मनाली-लेह हाईवे के अलावा आवाजाही का एक और वैकल्पिक मार्ग मिल जाएगा। यह सड़क न केवल जांस्कर घाटी के लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध कराएगी, बल्कि कठिन हिमालयी इलाके से गुजरने के कारण सेना के जवानों और साजो-सामान की आवाजाही को भी बेहद आसान बनाएगी।
हानू हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट और ट्रांसमिशन लाइन
लद्दाख में बिजली की उपलब्धता बढ़ाने के लिए 9 मेगावाट के हानू स्मॉल हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया जाएगा। इसके साथ ही 66 केवी की डबल-सर्किट दाह-हानू-खलत्सी ट्रांसमिशन लाइन भी शुरू होगी। इन परियोजनाओं से स्थानीय स्तर पर जल संसाधनों के माध्यम से बिजली उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और पूरे क्षेत्र में बिजली की सप्लाई व्यवस्था अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनेगी।
देश का पहला पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क
लेह के सिंधु घाट पर देश के पहले पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क का उद्घाटन किया जाएगा, जिसका उद्देश्य लद्दाख की प्राचीन शैलचित्रों और पत्थरों पर उकेरी गई हजारों साल पुरानी आकृतियों को सुरक्षित रखना है। लद्दाख में ऐसी सैकड़ों जगहें हैं जहां वन्यजीवों और इंसानों के प्रतीक उकेरे गए हैं, जो मानव इतिहास की जानकारी देते हैं। इस पार्क के जरिए इन ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
प्रोजेक्ट हिम सरोवर के तहत 40 गांवों में जलाशय
प्रधानमंत्री प्रोजेक्ट हिम सरोवर (अमृत हिम सरोवर) के तहत 40 गांवों में बनाए गए 40 जलाशयों का भी उद्घाटन करेंगे। लद्दाख में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण पूरे साल एक जैसी पानी की उपलब्धता नहीं रहती है। इन जलाशयों में पानी जमा होने से बुवाई के समय किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा, जिससे खेती पर निर्भर लोगों की आजीविका को बड़ा सहारा मिलेगा।

