नई दिल्ली। अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर इंडिया गेट पर प्रदर्शन कर रहे उनके माता-पिता को दिल्ली पुलिस ने गुरुवार तड़के करीब 3:45 बजे हिरासत में ले लिया। करीब दो घंटे की हिरासत के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। इस कार्रवाई के दौरान कांग्रेस नेता पवन खेड़ा, इमरान प्रतापगढ़ी, सुप्रिया श्रीनेत और अन्य पार्टी कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने सीआरपीसी और सुरक्षा बलों के साथ मिलकर हिरासत में ले लिया और सभी को तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में रखा गया।
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर विवाद
अंकिता उत्तराखंड के एक रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी। सितंबर 2022 में एक वीआईपी को विशेष सेवाएं देने से इनकार करने पर उसकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कोटद्वार की अदालत ने 30 मई 2025 को मुख्य आरोपी रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वर्तमान में अंकिता का परिवार दुष्यंत गौतम को हाल ही में सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने का विरोध कर रहा है। परिवार का आरोप है कि इस मामले में उनकी भूमिका संदिग्ध रही है और इसी के विरोध में वे इंडिया गेट पर धरने पर बैठे थे।
माता-पिता की दो टूक चेतावनी
हिरासत से छूटने के बाद अंकिता के पिता ने चेतावनी दी कि यदि उनकी बेटी को पूरी तरह इंसाफ नहीं मिला और दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द नहीं की गई, तो उन्हें मजबूरन एक बार फिर पूरे देश में सड़कों पर उतरना पड़ेगा। वहीं, अंकिता की मां ने कहा कि जब तक नियुक्ति रद्द नहीं होती, उनका संघर्ष जारी रहेगा और यदि उन्हें धरना देने से रोका गया तो वे अपने घर पर ही भूख हड़ताल शुरू कर देंगी।
विपक्षी नेताओं का समर्थन
इससे पहले बुधवार शाम को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने इंडिया गेट पहुंचकर अंकिता के माता-पिता से मुलाकात की थी और उन्हें सांत्वना दी थी। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि अंकिता के माता-पिता के साथ इस तरह का अमानवीय बर्ताव किया जाना बेहद शर्मनाक है और वे इस तरह के व्यवहार के बिल्कुल हकदार नहीं हैं।

