संसद में आज FCRA बिल पर अमित शाह का संबोधन संभव, प्रश्नकाल पर बना गतिरोध

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में उस समय हलचल तेज हो गई, जब केंद्र सरकार ने गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को विदेशों से मिलने वाले अनुदान में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से 'विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026' (FCRA) को पटल पर रखने का खाका तैयार किया। पूर्व में बजट सत्र के दौरान मार्च महीने में भी इस संशोधन विधेयक को सदन में पेश किया गया था, हालांकि तब यह पारित नहीं हो पाया था।

विदेशी चंदे और संपत्तियों पर कसेगा शिकंजा, क्यों अहम है यह विधेयक?

इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य गैर-सरकारी संगठनों द्वारा विदेशी फंडों के मनमाने इस्तेमाल पर लगाम लगाना और विधायी खामियों को दूर करना है। नए नियमों के अनुसार, यदि किसी संगठन का लाइसेंस या पंजीकरण रद्द होता है, तो विदेशी पैसों से खरीदी गई या निर्मित संपत्ति का प्रबंधन और नियंत्रण सरकार द्वारा तय प्राधिकरण के अधीन आ जाएगा। गृह मंत्री अमित शाह इस महत्वपूर्ण कानून पर सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए संसद को संबोधित कर सकते हैं।

राहुल गांधी ने रखी शर्तें, गृह मंत्री के बयान और राम मंदिर पर चर्चा की मांग

सदन की कार्यवाही में बने गतिरोध को खत्म करने के प्रयास में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। प्रियंका गांधी की मौजूदगी में हुई इस वार्ता के दौरान राहुल गांधी ने दो टूक शब्दों में अपनी शर्तें सामने रखीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीट (NEET) मामले में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग पर गृह मंत्री के वक्तव्य और अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी पर चर्चा कराए बिना विपक्ष का सहयोग मिलना संभव नहीं है।

विशेष सत्र और महिला आरक्षण विधेयक पर सरकार ने दिया स्पष्टीकरण

वार्ता के दौरान किरेन रिजिजू ने 131वें संविधान संशोधन (महिला आरक्षण व परिसीमन) पर भी विपक्ष की राय जाननी चाही, जिस पर राहुल गांधी ने अपने सहयोगी दलों से विमर्श के बाद जवाब देने की बात कही। इस बैठक के उपरांत मानसून सत्र को बढ़ाने या 17 अगस्त से कोई विशेष सत्र आयोजित करने की तमाम अफवाहों को खारिज करते हुए केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने साफ किया कि सत्र विस्तार या विशेष सत्र का फिलहाल कोई प्रशासनिक प्रस्ताव नहीं है।

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