वाशिंगटन: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच वाशिंगटन ने पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की तैयारी कर ली है। अमेरिकी नौसेना जल्द ही इस क्षेत्र में एक और विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात करने जा रही है। इसके साथ ही अमेरिका ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में ईरान द्वारा बिछाई गई समुद्री माइंस को सफलतापूर्वक हटाने का दावा किया है।
यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट स्ट्राइक ग्रुप की होगी तैनाती
अमेरिकी नौसेना संस्थान (USNI) की रिपोर्ट के अनुसार, 'यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट स्ट्राइक ग्रुप' अगले कुछ हफ्तों में सैन डिएगो से रवाना होगा। यह बेड़ा अगले सात महीने से अधिक समय तक पश्चिम एशिया में तैनात रहेगा। इस तैनाती का मुख्य मकसद क्षेत्र में पहले से मौजूद अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर को राहत देना है। इससे पहले यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन ने जापान से पहुंचकर यूएसएस अब्राहम लिंकन की जगह ली है, जो नवंबर 2025 से इस कठिन मिशन पर तैनात था। लंबे मिशन और तनाव के बाद अब लिंकन थाईलैंड में पोर्ट कॉल के लिए रवाना होगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य से हटाई गईं ईरानी माइंस, सैटकाम का दावा
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक बड़ा बयान जारी किया है। सैटकाम के कमांडर ब्रैड कूपर के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने इस प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग में बिछाई गई घातक समुद्री माइंस को पूरी तरह साफ कर दिया है। ये माइंस कई महीने पहले ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) द्वारा बिछाई गई थीं।
सुरक्षित हुआ अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग
सैटकाम कमांडर कूपर ने माइंस हटाने के इस ऑपरेशन को बेहद जटिल और खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि इस मिशन में अमेरिकी नौसेना के साथ-साथ थलसेना और वायुसेना की संयुक्त ताकत का इस्तेमाल किया गया था। कूपर ने पुष्टि की है कि अब होर्मुज जलडमरूमध्य की अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन पूरी तरह से खुली और सुरक्षित है, जिससे वहां व्यापारिक जहाजों की आवाजाही एक बार फिर से सामान्य हो रही है।

