Saturday, June 27, 2026
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दुनिया को धमका रहे ट्रंप बोले- नूरी अल-मलिकी प्रधानमंत्री बने तो इराक को तबाह कर देंगे

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Trump Threatens Iraq
Trump Threatens Iraq

Trump Threatens Iraq , वॉशिंगटन : वेनेजुएला के राष्ट्रपति को बंदी बना कर अपने देश लाने वाले  अमेरिकी राष्ट्रपति के हौसले बढ़ते ही जा रहे हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को धमकी देने के बाद अब अपना अगला टारगेट इराक को बनाया है.   राष्ट्रपति ट्रंप ने अब इराक को धमकी दी है कि अगर आम चुनावों में जीत कर पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल-मलिकी एक बार फिर से सत्ता में आते हैं तो वो इराक को बर्बाद कर देंगे.

Trump Threatens Iraq :ट्रंप ने दी इराक को बर्बाद  करने की धमकी 

इराक में हाल ही में हुए चुनावों के बाद रुझान पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल-मलिकी के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं, लेकिन ट्रंप ने आधिकारिक नतीजे आने से पहले ही इराक को कड़े लहजे में चेतावनी जारी कर दी है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि यदि नूरी अल-मलिकी दोबारा सत्ता में लौटते हैं, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर और विनाशकारी होंगे. ट्रंप ने इराक को धमकी दी कि अल-मलिकी के प्रधानमंत्री बनने की स्थिति में अमेरिका इराक को पूरी तरह तबाह कर देगा.

 अल-मलिकी के शासन में इराक में गरीबी बढ़ी- ट्रंप   

उन्होंने अल-मलिकी की नीतियों को सनकी करार देते हुए दावा किया कि उनके पिछले आठ साल के शासनकाल के दौरान इराक केवल गरीबी और अराजकता की ओर बढ़ा है. ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि यदि वे फिर से सत्ता संभालते हैं, तो अमेरिका इराक को मिलने वाली किसी भी प्रकार की सहायता पर तत्काल रोक लगा देगा.

 कौन है नूरी अल- मलिकी ?

नूरी अल-मलिकी इराक के एक कद्दावर नेता हैं, जो 2006 से 2014 तक दो बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं. 1968 में जन्मे अल-मलिकी का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है. सद्दाम हुसैन के शासनकाल के दौरान उन्होंने बाथ पार्टी का विरोध किया, जिसके चलते उन्हें 1979-80 में मौत की सजा सुनाई गई थी. वे लंबे समय तक निर्वासन में रहे और 2003 में अमेरिकी आक्रमण के बाद ही इराक वापस लौटे. वर्तमान में उन्हें शिया कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क का समर्थन प्राप्त है, जिसके पास संसद में बहुमत है. गठबंधन का मानना है कि अल-मलिकी के पास अनुभव की कोई कमी नहीं है, जबकि ट्रंप को उनमें सद्दाम हुसैन जैसी प्रवृत्तियां और ईरान के प्रति झुकाव नजर आता है.

अल मलिकी से ट्रंप की क्या है नाराजगी ?

ट्रंप की इस नाराजगी के पीछे की मुख्य वजह अल-मलिकी के शासनकाल में उभरे शिया अर्धसैनिक बल और ईरान के साथ उनके करीबी संबंध हैं. 2014 में जब आईएसआईएस का प्रभाव बढ़ा, तब अल-मलिकी ने सुन्नी चरमपंथियों से लड़ने के लिए कई हथियारबंद समूह बनाए थे. अमेरिका इन गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों को भंग करने की मांग करता रहा है. अमेरिका के विशेष दूत मार्क सवाया पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि इन समूहों पर लगाम न लगाने से इराक फिर से पतन की ओर बढ़ सकता है. हालांकि, जानकारों का मानना है कि ट्रंप के लिए इराक में सैन्य हस्तक्षेप करना इतना आसान नहीं होगा.

इतिहास गवाह है कि 2003 में सद्दाम हुसैन को हटाने के लिए किए गए अमेरिकी आक्रमण ने इराक को सालों तक अस्थिरता, सांप्रदायिक हिंसा और आतंकवाद की आग में झोंक दिया था. उस युद्ध में 4,400 से अधिक अमेरिकी सैनिक मारे गए और अमेरिका पर भारी वित्तीय बोझ पड़ा. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ट्रंप अपनी धमकियों को हकीकत में बदलते हैं या यह महज एक कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है.