SpaceX Falcon-9 Moon Impact वाशिंगटन : अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी स्पेस एक्स के फाल्कन-9 रॉकेट का एक ऊपरी हिस्सा भारतीय समयानुसार दोपहर लगभग 12:05 बजे चंद्रमा पर स्थित ‘आइंस्टीन क्रेटर’ के पास जाकर टकरा गया है। हालांकि, इस टक्कर की आधिकारिक पुष्टि होने और इसके प्रभाव का आकलन करने में अभी कुछ घंटों का समय लग सकता है।
SpaceX Falcon-9 Moon Impact: किस मिशन के तहत अंतरिक्ष में भेजा गया था यह हिस्सा?
लगभग 4,500 किलोग्राम वजन वाला यह ऊपरी हिस्सा, चंद्रमा के लिए ‘ब्लू घोस्ट मिशन’ लॉन्च किए जाने के बाद से पिछले 19 महीनों से लगातार अंतरिक्ष की कक्षाओं में चक्कर काट रहा था। वैज्ञानिकों द्वारा इसके टकराने के संभावित मार्ग को कुछ ही सेकंड और कुछ सौ मीटर की अचूक सटीकता के साथ पहले ही ट्रैक कर लिया गया था।
खगोलीय गतिविधियों पर नजर रखने वाली कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से निगाह बनाए हुए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस टक्कर के परिणामस्वरूप चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगा रहे ऑर्बिटर आने वाले कुछ दिनों में सतह पर बने नए क्रेटर (गड्ढे) का आसानी से पता लगा लेंगे। स्पष्ट कर दें कि यह कोई पूरा रॉकेट नहीं था, बल्कि फाल्कन-9 रॉकेट का केवल दूसरा हिस्सा (ऊपरी चरण) था, जो पुनर्चक्रित होने वाले पहले हिस्से (फर्स्ट स्टेज) के अलग होने के बाद मुख्य मिशन के लिए चालू होता है।
कब लॉन्च किया गया था यह अंतरिक्ष अभियान?
लगभग 12 मीटर लंबे और करीब 4,500 किलोग्राम वजनी इस रॉकेट हिस्से को 15 जनवरी, 2025 को अंतरिक्ष में लॉन्च किया गया था। यह अपने साथ फायरफ्लाई एयरोस्पेस के ‘ब्लू घोस्ट-1’ और जापानी कंपनी आईस्पेस के ‘हाकुटो-आर मिशन 2’ लैंडर्स को चंद्रमा की ओर ले जा रहा था।
दुर्घटनाग्रस्त होने में लगे इतने महीने क्यों?
लॉन्चिंग के बाद यह मलबा पृथ्वी और चंद्रमा के बीच एक चौड़े और बेहद अस्थिर दीर्घवृत्ताकार घेरे में घूमता रह गया। पिछले कई महीनों से पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बलों के हल्के खिंचाव के अलावा सूर्य की रोशनी के दबाव (जिसे सोलर रेडिएशन प्रेशर कहा जाता है) ने हर गुजरते दिन के साथ इसके उड़ान पथ को थोड़ा-थोड़ा बदल दिया।
आख़िरकार, इन लगातार और छोटे-छोटे मार्ग परिवर्तनों के कारण यह अनियंत्रित होकर सीधे चंद्रमा से जा टकराया। स्पेस एक्स की ओर से पहले ही यह स्पष्ट किया जा चुका था कि इस स्टेज का बचा हुआ ईंधन पूरी तरह खाली कर दिया गया था ताकि इसे सुरक्षित किया जा सके। हालांकि, इतनी अधिक ऊर्जा वाले और तेज गति के रास्ते पर चल रहे इस हिस्से को नियंत्रित करते हुए वापस धरती पर लाकर नष्ट करने वाला ‘बर्न’ करना तकनीक रूप से संभव नहीं था। इस पूरी घटना के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने देश-दुनिया को आश्वस्त किया है कि इस टक्कर से पृथ्वी और मानवता को किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं है।

