SCO Summit 2026: भारत के लिए क्यों खास है इस बार की बैठक, समझें पूरा समीकरण

बिश्केक | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में मौजूद हैं। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री मोदी किर्गिस्तान के शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय बैठकों में भी हिस्सा लेंगे। भारत न केवल शंघाई सहयोग संगठन का एक अत्यंत अहम सदस्य है, बल्कि इसके सबसे प्रभावशाली और ताकतवर देशों में भी शुमार होता है। पीएम मोदी किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जैपारोव के आधिकारिक निमंत्रण पर 31 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित होने वाले इस वैश्विक सम्मेलन में शिरकत कर रहे हैं।

क्या है शंघाई सहयोग संगठन (SCO)?

शंघाई सहयोग संगठन यूरेशियाई क्षेत्र के देशों का एक प्रमुख अंतर-सरकारी संगठन और आर्थिक-सुरक्षा गठबंधन है। इसकी शुरुआत वर्ष 1996 में 'शंघाई फाइव' के रूप में हुई थी, लेकिन पिछले तीन दशकों में विस्तार करते हुए यह वर्तमान में 10 पूर्ण सदस्य देशों और 2 पर्यवेक्षक देशों का एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय संगठन बन चुका है।

  • शंघाई फाइव की स्थापना: साल 1996 में चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान ने मिलकर 'शंघाई फाइव' की नींव रखी थी। इसका मुख्य उद्देश्य सोवियत संघ के विघटन के पश्चात उभरे सीमा विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाना और क्षेत्रीय सैन्य तनाव को कम करना था।

  • औपचारिक एससीओ का गठन: वर्ष 2000 में उज्बेकिस्तान भी इस समूह से जुड़ गया। इसके बाद 15 जून 2001 को चीन के शंघाई शहर में इन सभी छह देशों के नेताओं ने मिलकर औपचारिक रूप से 'शंघाई सहयोग संगठन' (SCO) की स्थापना की घोषणा की।

  • एससीओ चार्टर: इस संगठन के मूल नियमों और वैधानिक दस्तावेजों (एससीओ चार्टर) पर 7 जून 2002 को हस्ताक्षर किए गए थे, जो औपचारिक रूप से 19 सितंबर 2003 से प्रभावी हो गए।

एससीओ की आर्थिक और सामरिक ताकत

1. वैश्विक जीडीपी में बड़ी हिस्सेदारी: शंघाई सहयोग संगठन के तमाम सदस्य देश मिलकर दुनिया की कुल जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा साझा करते हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था में इस समूह के बड़े प्रभाव को दर्शाता है।

2. अंतरराष्ट्रीय व्यापार और संपर्क: ये देश वैश्विक व्यापार के 15 प्रतिशत से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। संगठन के भीतर क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देने, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और परिवहन कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाता है।

3. प्रमुख आर्थिक परियोजनाएं: वर्तमान में एससीओ के सदस्य देश आपसी व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक प्रस्तावित 'एससीओ विकास बैंक' की स्थापना पर विचार कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, रूस के सेंट पीटर्सबर्ग शहर को भारत के मुंबई से जोड़ने वाले 'इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर' (INSTC) और माल ढुलाई की सुगम व्यवस्था के लिए 'सिल्क रोड स्टेशन्स' के नेटवर्क को विकसित करने पर तेजी से काम किया जा रहा है।

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