पेरिस। फ्रांस समेत कई यूरोपीय देशों में युवाओं और विभिन्न नागरिक संगठनों का गुस्सा लगातार भड़कता जा रहा है। फ्रांस की राजधानी में युवाओं और प्रमुख मजदूर यूनियनों के आह्वान पर विशाल प्रदर्शन आयोजित किया गया। यद्यपि दिनभर चला यह विरोध प्रदर्शन आमतौर पर शांतिपूर्ण रहा, लेकिन शाम ढलते ही कई इलाकों में उपद्रव और हिंसक झड़पें देखने को मिलीं। दूसरी ओर, इटली में भी प्रधानमंत्री जियॉर्जिया मेलोनी के खिलाफ युवाओं का असंतोष सड़कों पर आ गया है, जिससे पूरे यूरोप में अस्थिरता का माहौल बनता दिख रहा है।
फ्रांस में भारी पुलिस तैनाती के बावजूद हिंसा और विरोध प्रदर्शन
फ्रांस के गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देशभर में चार लाख से अधिक लोगों ने इस विरोध मार्च में हिस्सा लिया, जबकि प्रमुख मजदूर यूनियनों ने यह संख्या करीब आठ लाख होने का दावा किया है। कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए सरकार ने सत्तर हजार सुरक्षाकर्मियों के साथ बख्तरबंद गाड़ियां, वॉटर कैनन और हेलीकॉप्टर तैनात किए थे। इसके बावजूद ल्योन और नांत जैसे शहरों में प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़कर सड़क जाम करने का प्रयास किया, जिन्हें खदेड़ने के लिए पुलिस को आंसू गैस और वॉटर कैनन का प्रयोग करना पड़ा। ऑरलियंस शहर में भी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन दोनों के खिलाफ भारी भीड़ ने नारेबाजी करते हुए विरोध दर्ज कराया।
इटली, स्पेन और अन्य यूरोपीय देशों में भी भड़का असंतोष
पेरिस के अलावा इटली के रोम और मिलान शहरों में हजारों छात्रों और नागरिकों ने रैलियां निकालकर प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग की। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार को प्रमुख सड़कों और वाणिज्यिक क्षेत्रों में अतिरिक्त सैन्य बल तैनात करना पड़ा। इसी प्रकार स्पेन की राजधानी मैड्रिड में पेंशनभोगियों ने सरकारी कटौती के विरोध में प्रदर्शन किया, जबकि पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में किफायती आवास की मांग को लेकर लोग सड़कों पर उतरे। अल्बानिया की राजधानी तिराना में बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से परेशान छात्रों का प्रदर्शन उग्र हो गया, जहां प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों को निशाना बनाया।
आगामी दिनों में और तेज होगा विरोध का सिलसिला
बेल्जियम के ब्रसेल्स में भी शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़पें दर्ज की गईं। यूरोपीय देशों में युवाओं और श्रमिक संगठनों ने आने वाले दिनों के लिए बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली है। फ्रांस की प्रमुख यूनियनों ने जहां पांच नवंबर को देशव्यापी आम हड़ताल की घोषणा की है, वहीं स्पेन में ग्यारह नवंबर और इटली में बीस नवंबर को राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा जर्मनी में भी इकतीस अक्टूबर को युवाओं द्वारा आर्थिक नीतियों और बढ़ती महंगाई के विरोध में विशाल प्रदर्शन आयोजित करने की तैयारी है।

