Saturday, February 21, 2026

बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में पाकिस्तान की जमकर हुई बेइज्जती, हाशिए पर पीएम शरीफ

Gaza Board of Peace वाशिंगटन : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गाजा के पुनर्निर्माण और शांति बहाली के लिए गठित बोर्ड ऑफ पीस की पहली औपचारिक बैठक ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के नए समीकरण स्पष्ट कर दिए हैं. वाशिंगटन में आयोजित इस हाई-प्रोफाइल बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की उपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. पूरी बैठक के दौरान पाकिस्तान न केवल कूटनीतिक रूप से असहज दिखा, बल्कि सांकेतिक तौर पर भी उसे किनारे कर दिया गया. इस घटनाक्रम ने विशेषज्ञों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या अमेरिका की नई शांति योजना में पाकिस्तान अपनी प्रासंगिकता खोता जा रहा है.

Board of Peace में सऊदी अरब, कतर,इंडोनेशिया जैसे मुस्लिम देशों को प्राथमिकता

बैठक के बाद जब आधिकारिक ग्रुप फोटो जारी की गई, तो उसने पाकिस्तान की वर्तमान कूटनीतिक स्थिति की एक धुंधली तस्वीर पेश की. सूत्रों के अनुसार, जहां राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो केंद्रीय भूमिका में थे, वहीं सऊदी अरब, कतर और इंडोनेशिया जैसे मुस्लिम जगत के प्रभावशाली देशों के नेताओं को उनके ठीक पीछे प्रमुखता दी गई. इसके विपरीत, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को फ्रेम के अंतिम किनारों पर जगह मिली. कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नेताओं का स्थान और उनकी स्थिति केवल एक संयोग नहीं होती, बल्कि यह उस देश के महत्व का संकेत देती है.

गाजा में शांति प्रयास को लेकर पाकिस्तान का रुख साफ नहीं  

बैठक में मौजूद राजनयिक सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल पूरे समय असहज दिखा. इसका मुख्य कारण गाजा के मुद्दे पर पाकिस्तान का अस्पष्ट रुख माना जा रहा है. ट्रंप की इस योजना के तहत सदस्य देशों से गाजा में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए हजारों सैनिकों की टुकड़ी भेजने की उम्मीद की गई थी. हालांकि पाकिस्तान ने शुरुआती दौर में इसमें रुचि दिखाई थी लेकिन अब इस्लामाबाद अपनी सेना भेजने के निर्णय पर हिचकिचा रहा है. इसका सीधा परिणाम तब दिखा जब राष्ट्रपति ट्रंप ने सैन्य मदद देने वाले देशों की सूची पढ़ी. उन्होंने इंडोनेशिया, मोरक्को, अल्बानिया, कोसोवो, कजाकिस्तान, मिस्र और जॉर्डन का नाम तो लिया, लेकिन इस सूची से पाकिस्तान का नाम पूरी तरह गायब था.

वाशिंगटन के गलियारों में यह चर्चा आम रही कि पाकिस्तान अक्सर अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर बड़े दावे तो करता है, लेकिन जब वास्तविक प्रतिबद्धता और संसाधनों की बात आती है, तो वह पीछे हट जाता है. गाजा के पुनर्निर्माण के लिए लगभग 70 अरब डॉलर की आवश्यकता है, जिसके लिए अब तक 5 अरब डॉलर का फंड जुट पाया है. इस वित्तीय सहयोग में भी पाकिस्तान का कोई उल्लेखनीय योगदान नजर नहीं आया. हालांकि, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को उस समय थोड़ी व्यक्तिगत राहत मिली जब राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने भाषण में उनकी और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की तारीफ की.

ट्रंप ने अपने चिर-परिचित मजाकिया लहजे में पुराने विवादों को याद करते हुए कहा, मुझे यह व्यक्ति (शहबाज शरीफ) पसंद है. उन्होंने जनरल मुनीर को एक मजबूत फाइटर करार दिया और उनके हवाले से फिर वही पुराना दावा दोहराया कि ट्रंप ने भारत-पाक युद्ध को रोककर 2.5 करोड़ लोगों की जान बचाई थी.

ट्रंप द्वारा गठित बोर्ड ऑफ पीस को वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के एक संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इसका प्राथमिक लक्ष्य युद्धग्रस्त क्षेत्रों में पुनर्निर्माण और शांति स्थापित करना है। 40 से अधिक देशों और भारत जैसे पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में हुई इस बैठक ने पाकिस्तान को एक कड़वी सच्चाई का अहसास कराया है। यदि इस्लामाबाद ने अपनी प्राथमिकताओं और वैश्विक मुद्दों पर ठोस योगदान को लेकर स्पष्टता नहीं दिखाई, तो भविष्य में वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर केवल एक दर्शक बनकर रह जाएगा।

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