सऊदी के साथ खड़ा पाकिस्तान, जरूरत पड़ने पर सैनिक भेजने को भी तैयार

इस्लामाबाद/रियाद। यमन के हूतियों द्वारा सऊदी अरब पर लगातार किए जा रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव काफी बढ़ गया है। इस संवेदनशील हालात के बीच पाकिस्तान ने सऊदी अरब के समर्थन में अपना अब तक का सबसे कड़ा और स्पष्ट सैन्य बयान जारी किया है।

सऊदी सुरक्षा के लिए 'किसी भी हद' तक जाने की चेतावनी

पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग (ISPR) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने एक साक्षात्कार में दो टूक कहा है कि पाकिस्तान केवल कूटनीतिक रूप से ही नहीं, बल्कि पूरी सैन्य ताकत के साथ सऊदी अरब के साथ खड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान सऊदी रक्षा के लिए 'किसी भी हद तक' जाने को तैयार है।

पवित्र स्थलों की सुरक्षा और रणनीतिक समझौते

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबद्धता सिर्फ सऊदी भौगोलिक सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों—मक्का और मदीना की सुरक्षा—की अटूट गारंटी भी शामिल है।

  • रक्षा समझौता: गत 7 अगस्त को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच मक्का संयुक्त रक्षा समझौता हुआ था। इसके तहत यदि तीनों देशों में से किसी एक पर भी हमला होता है, तो उसे तीनों पर आक्रमण माना जाएगा।

  • सैन्य तैनाती: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान पहले से ही सऊदी अरब में अपने करीब 8,000 सैनिक, जेएफ-17 लड़ाकू विमान, आधुनिक ड्रोन और एचक्यू-9 एयर डिफेंस सिस्टम तैनात कर चुका है।

ईरान से अपील और कूटनीतिक बदलाव

विश्लेषकों का मानना है कि पिछले हफ्ते पाकिस्तान के विदेश कार्यालय का रुख जहां काफी संभला हुआ था, वहीं अब पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व का यह सीधा बयान एक बड़ा रणनीतिक बदलाव है। इस तनाव को थामने के लिए पाकिस्तान और चीन ने संयुक्त रूप से ईरान से अपील की है कि वह हूतियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे, ताकि सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचों और सैन्य ठिकानों पर होने वाले हमलों को रोका जा सके।

 

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