हाइपरसोनिक हथियारों में चीन की बड़ी छलांग, दूर बैठे अमेरिकी सपोर्ट विमानों तक पहुंच सकता है खतरा

बीजिंग। वैश्विक सैन्य होड़ में अपनी बढ़त बनाने के लिए चीन ने एक ऐसा नया और घातक हथियार विकसित किया है, जो भविष्य के युद्धों में अमेरिकी वायुसेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है। चीन ने ऐसे हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) तैयार किए हैं, जो हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें दाग सकते हैं। इस नए हथियार की सीधी मारक क्षमता में अमेरिका के दूरदराज स्थित सैन्य ठिकाने और प्रमुख हवाई अड्डे आ रहे हैं, जिससे वाशिंगटन में सामरिक चिंताएं बढ़ गई हैं।

लड़ाकू विमान नहीं, 'सपोर्ट एयरक्राफ्ट' होंगे मुख्य निशाना

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, चीन का यह हथियार अग्रिम मोर्चे के लड़ाकू विमानों के बजाय अमेरिका के उन उच्च-मूल्य वाले सहायक विमानों (High-Value Airborne Assets) को ध्वस्त करने के लिए बनाया गया है, जो युद्ध क्षेत्र से काफी पीछे रहकर पूरी सैन्य कार्रवाई का संचालन करते हैं। इनमें हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर विमान, उड़ते हुए कमांड सेंटर और 'E-4B नाइटवॉच' जैसे एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल (AWACS) विमान शामिल हैं। इन रीढ़ माने जाने वाले सपोर्ट विमानों के नष्ट होते ही अमेरिका की हवाई संचालन क्षमता पूरी तरह लड़खड़ा सकती है।

गुआम से हवाई तक पहुंचेगी DF-17 और DF-27 मिसाइलों की मार

हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन की सबसे बड़ी खासियत इसकी अत्यधिक रफ्तार और उड़ान के दौरान दिशा बदलने की क्षमता है, जिससे इसे किसी भी मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम से इंटरसेप्ट करना बेहद कठिन है। चीन की 'DF-17' मिसाइल से छोड़ा गया यह व्हीकल करीब 2,414 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है, जो अमेरिकी सैन्य अड्डे 'गुआम' के बिल्कुल करीब पहुंचता है। वहीं, लंबी दूरी की 'DF-27' मिसाइल की मारक क्षमता करीब 5,000 मील (लगभग 8,000 किमी) तक बताई गई है, जिसकी ज़द में अमेरिका का 'हवाई' द्वीप भी आ जाता है।

जटिल 'किल चेन' और संभावित युद्ध का नया स्वरूप

हालांकि, हजारों किलोमीटर दूर उड़ते विमान पर इतनी दूरी से सटीक निशाना साधना तकनीकी रूप से काफी जटिल है। इसके लिए चीन को एक लंबी 'किल चेन' (सेंसर से लेकर मिसाइल तक सूचना भेजने की सतत प्रक्रिया) पर निर्भर रहना होगा, जिसे दुश्मन इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से बाधित करने का प्रयास कर सकता है। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुमानों के मुताबिक, 2024 तक चीन के पास 3,150 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें मौजूद थीं। इस नए विकास के बाद अमेरिका भी लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का परीक्षण तेज कर रहा है।

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