पालतू कुत्तों और बिल्लियों में भी तेजी से बढ रहे डायबिटीज के मामले

लंदन । अभी तक डायबिटीज मुख्य रूप से इंसानों की बीमारी माना जाता था, लेकिन मौजूदा समय में शहरों में पालतू कुत्तों और बिल्लियों में भी डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। इन जानवरों का शुगर लेवल भी असामान्य रूप से बढ़ रहा है, जिससे उन्हें किडनी संबंधी समस्याओं से लेकर हृदय रोगों तक का गंभीर खतरा हो रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पालतू जानवरों की बदलती जीवनशैली, अनियमित और गलत खानपान, और शारीरिक गतिविधियों की कमी इस गंभीर समस्या के पीछे प्रमुख कारक बन रहे हैं। डायबिटीज से बचाव के लिए उनके आहार और व्यायाम को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाना अनिवार्य है। ऐसे में, यदि आप भी डॉग लवर हैं या किसी भी पालतू जानवर के मालिक हैं, तो आपको सतर्क रहने की आवश्यकता है, क्योंकि आपकी एक छोटी सी लापरवाही आपके प्यारे पेट की सेहत पर भारी पड़ सकती है। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया है कि बीते पांच वर्षों में कुत्तों और बिल्लियों में डायबिटीज के मामलों में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि हुई है।
यह अक्सर देखा जाता है कि पालतू जानवरों के मालिक तब तक डॉक्टर के पास नहीं पहुंचते, जब तक कि बीमारी काफी गंभीर अवस्था में न पहुंच जाए। ऐसी स्थिति में, पालतू जानवर का शुगर लेवल 500 से भी अधिक हो सकता है, जो बेहद खतरनाक होता है। इस बढ़ते खतरे के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि आजकल लोग अपने पालतू जानवरों पर पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं, जिससे उनकी शारीरिक और पोषण संबंधी आवश्यकताओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। खासकर शहरी परिवेश में, डॉग्स को अक्सर अत्यधिक कैलोरी वाला भोजन, मीठी चीजें और पैकेज्ड फूड खिलाया जा रहा है, जिससे उनके शरीर में ग्लूकोज का संतुलन बिगड़ जाता है। मोटापा भी इस समस्या का एक बड़ा कारण बन रहा है, क्योंकि इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या पैदा होती है, जिससे शरीर इंसुलिन का ठीक से उपयोग नहीं कर पाता। इसके साथ ही, शारीरिक गतिविधियों की कमी भी डायबिटीज के इस खतरे को और बढ़ा रही है, क्योंकि व्यायाम की अनुपस्थिति में शरीर ग्लूकोज का कुशलता से उपयोग नहीं कर पाता। डायबिटीज से ग्रसित कुत्तों और बिल्लियों में कुछ विशिष्ट संकेत दिखाई देते हैं, जिन पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे पालतू जानवरों को सामान्य से कहीं अधिक प्यास लगती है और वे बार-बार पेशाब करते हैं।
इसके साथ ही, उनकी भूख अचानक बढ़ जाती है, लेकिन इसके बावजूद उनका वजन तेजी से घटने लगता है, जो एक विरोधाभासी लेकिन महत्वपूर्ण लक्षण है। इसके अलावा, उनमें सुस्ती, उदासी और कमजोरी साफ तौर पर नजर आती है। कई गंभीर मामलों में, उनकी आंखों की रोशनी धुंधली होने लगती है, जबकि उनकी त्वचा और बालों की गुणवत्ता भी खराब हो जाती है, जिससे उनके फर रूखे और बेजान दिखने लगते हैं। यदि किसी जानवर को चोट लग जाए, तो उसका घाव भी बहुत देर से भरता है, जो संक्रमण के जोखिम को बढ़ाता है। ये सभी संकेत डायबिटीज की ओर स्पष्ट इशारा करते हैं और इन्हें कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि शुरुआती पहचान से बेहतर इलाज संभव है। रक्त शर्करा का स्तर बढ़ने पर सबसे पहले आंखों पर असर दिखना शुरू होता है, जिससे नजर से जुड़ी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

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