अमेरिका का अहम कदम: इंडो-पैसिफिक कमांड के नाम परिवर्तन से क्या बदलेगा?

वॉशिंगटन: अमेरिका ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाते हुए अपने 'यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड' (USINDOPACOM) का नाम बदलकर एक बार फिर 'यूएस पैसिफिक कमांड' (USPACOM) कर दिया है। इसके साथ ही अमेरिकी रक्षा विभाग ने वर्ष 2018 में लिए गए अपने आठ साल पुराने फैसले को पलट दिया है। मंगलवार को इसकी आधिकारिक घोषणा करते हुए पेंटागन ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव कमांड के ऐतिहासिक गौरव, गहरी जड़ों और समृद्ध विरासत को सम्मान देने के लिए किया गया है। गौरतलब है कि इस सबसे पुरानी और सबसे बड़ी सैन्य कमांड की स्थापना साल 1947 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन ने की थी।

ऐतिहासिक विरासत की बहाली और पेंटागन का तर्क

अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के अनुसार, 1 जनवरी 1947 को स्थापित यह सैन्य बल लगभग 70 वर्षों से अधिक समय तक 'यूएस पैसिफिक कमांड' के नाम से ही संचालित होता रहा। यह अमेरिका की सभी एकीकृत सैन्य कमांडों में सबसे पुरानी और क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ी कमांड है।

रक्षा विभाग ने अपने बयान में कहा कि पुराने नाम की बहाली प्रशांत क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैन्यकर्मियों के बीच गर्व और सामूहिक भावना को मजबूत करेगी। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था से लेकर कोरियाई युद्ध, वियतनाम युद्ध और दुनिया भर में चलाए गए अनेक मानवीय अभियानों के समन्वय तक, 'यूएस पैसिफिक कमांड' का नाम हमेशा सैन्य शौर्य और क्षेत्रीय साझेदारियों का प्रतीक रहा है।

भारत की पश्चिमी सीमा तक दायरा, पर मिशन में कोई बदलाव नहीं

पेंटागन ने साफ किया है कि नाम बदले जाने के बावजूद कमांड के भौगोलिक अधिकार क्षेत्र (Area of Responsibility) में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस कमांड का संचालन क्षेत्र आज भी अमेरिका के पश्चिमी तट से शुरू होकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला हुआ है।

रक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि कमांड का मूल मिशन, उसकी रणनीतिक प्राथमिकताएं और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर एक स्वतंत्र, सुरक्षित और खुले क्षेत्र को बनाए रखने की प्रतिबद्धता पहले की तरह ही मजबूत रहेगी।

2018 में नाम बदलने की वजह और वर्तमान भू-राजनीतिक मायने

साल 2018 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान तत्कालीन अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने इस कमांड का नाम बदलकर 'इंडो-पैसिफिक कमांड' करने की घोषणा की थी। उस समय हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच बढ़ती रणनीतिक और आर्थिक परस्पर निर्भरता तथा भारत के बढ़ते वैश्विक महत्व को देखते हुए यह कदम उठाया गया था। मैटिस ने तब चुटीले अंदाज में कहा था कि यह कमांड 'बॉलीवुड से हॉलीवुड तक और पेंगुइन से ध्रुवीय भालुओं तक' फैले विशाल क्षेत्र की सुरक्षा संभालती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि 2018 में 'इंडो' शब्द जोड़ना भारत-अमेरिका के रणनीतिक रिश्तों में आ रही तेजी का प्रतीक था। हालांकि, ट्रंप प्रशासन के वर्तमान दूसरे कार्यकाल में भारत और अमेरिका के रिश्तों में कुछ उतार-चढ़ाव देखे गए हैं। व्यापारिक टैरिफ (शुल्क) को लेकर हुए विवादों और फिर 'ऑपरेशन सिंदूर' में युद्धविराम के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच खुलकर मतभेद सामने आए हैं। ऐसे संवेदनशील समय में अमेरिका द्वारा 'इंडो' शब्द को हटाकर दोबारा पुराना नाम बहाल करना वैश्विक कूटनीति के गलियारों में कई नए सवाल खड़े कर रहा है।

 

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