प्रयागराज: भारत की महान नदियों को प्रदुषण और गंदगी से बचाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि अगले महाकुंभ से पहले ऐसी कार्ययोजना पर अमल करें. जिससे मेला क्षेत्र व शहर का गंदा पानी सीधे गंगा यमुना में न जाने पाए. महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्र ने कहा राज्य सरकार आगामी महाकुंभ को देखते हुए मेगा योजना तैयार करने पर विचार कर रही है.यूपी सरकार का कहना है कि वो जल्द ही अधिकारीयों से मीटिंग कर इस दिशा में योजना बनाएंगे .
क्या है पूरा मामला?
दरअसल कानपुर ,उन्नाव जैसे शहरों में चर्म उद्योगों का पानी मेले के दौरान गंगा में न जाय , इसके लिए प्रयागराज के जिलाधिकारी ,कानपुर के अधिकारियों से बात कर रहे हैं. कोर्ट ने जानना चाहा कि क्या मेला क्षेत्र में अस्थाई सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जा सकता है. जिससे कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं से होने वाली गंदगी गंगा में न जा सके. मेला प्राधिकरण से हलफनामा मांगा है.
कोर्ट ने मेले के दौरान कानपुर व प्रयागराज के बीच गंगा प्रवाह व जल की गुणवत्ता की नियमित जांच करने का भी निर्देश दिया. जिसमें ये भी पूछा कि प्रयागराज की पूरी सीवर लाइन को कितने समय में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ा जा सकता है. जिसका जवाब देते हुए न्यायमित्र अरुण गुप्ता का कहना था कि 40फीसदी सीवर अभी जोड़ी नहीं गई है.
वहीं इस दौरान कोर्ट ने पालिथिन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध की निगरानी करने का निर्देश भी दिया और कहा कि कोर्ट का काम प्रशासन चलाना नहीं है. कोर्ट ने कहा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट शहर की आबादी और उत्सर्जन को ध्यान में रख कर तैयार किया जाय. प्लांट के ओवर फ्लो होने की जानकारी मिलने पर कोर्ट ने यह आदेश दिया.
कोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार
इसके अलावा बायोरेमिडियल सिस्टम से नालों के शोधन की पूरी प्रक्रिया का पालन न करने पर इसे धोखा बताते हुए हाई कोर्ट ने यूपी सरकार को फटकार लगाई है . कोर्ट ने कहा कि गंगा यमुना में नालों का गंदा पानी नहीं जाना चाहिए. 16साल से याचिका की सुनवाई हो रही है, केंद्र राज्य सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च किए, लेकिन गंगा प्रदूषण पर कोई फर्क नहीं दिखाई देता. याचिका की अगली सुनवाई 19जनवरी को फिर होगी.
यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ,न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति अजित कुमार की पूर्ण पीठ ने गंगा प्रदूषण को लेकर कायम जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है. अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव व सुनीता शर्मा ने कहा कि गंगा में जा रहे गंदे नाले की जांच शोधन से पहले और शोधन के बाद कराई जाय. कहा शोधित पानी जहरीला है ,खेतों में सिंचाई लायक नहीं. ऐसा पानी गंगा में मिलने से नहाने लायक भी नहीं है.
मुख्य स्थायी अधिवक्ता राजेश्वर तिवारी ने महाधिवक्ता के साथ आदेश की अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की . जिसमें कोर्ट ने पूछा की स्नान पर्व शुरू हो गया है. गंगा जल तो पीने और आचमन योग्य नहीं है. एसटीपी ओवरफ्लो है और उससे गंदा पानी सीधे गंगा में जा रहा है. महाधिवक्ता ने बताया कि प्रयागराज में 76 नाले है. 16 नालो का शोधन एसटीपी में हो रहा है. वह भी ओवर फ्लो है. बाकी बचे नालों को टैप किया गया है. शासन युद्ध स्तर पर काम कर रहा है. कुंभ से पहले काफी कुछ किया जाना है.

