Friday, February 13, 2026

Ramayan: रामचरित्रमानस से कुछ चौपाइयों को हटाने की मांग को लेकर स्वामी प्रसाद मौर्या ने लिखा प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को पत्र

रामचरितमानस को लेकर खड़े हुए विवाद को एसपी के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ठंडा नहीं पड़ने देना चाहते हैं. बुधवार को स्वामी प्रसाद मौर्य ने ट्विटर पर एक ट्वीट कर आरोप लगाया कि कुछ लोग धर्म की आड़ में मुद्दे को भड़काने की कोशिश कर रहे है. मौर्या ने लिखा कि “मानस की आपत्तिजनक कुछ चौपाइयों को संशोधित व प्रतिबंधित करने की मांग को, कुछ लोग श्रीराम, हिंदू धर्म और रामचरितमानस से जोड़कर मामले को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे ही लोग महिलाओं, आदिवासियों, दलितों व पिछड़ों के 97% आबादी के सम्मान के विरोधी हैं.”

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को लिखा मौर्या ने पत्र

स्वामी प्रसाद मौर्या ने रामायण से महिलाओं और छोटी जातियों का अपमान करने वाली चौपाइयों को हटाने के लिए प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को एक पत्र भी लिखा है. मौर्या ने अपना ये पत्र भी ट्विटर पर शेयर किया है. इससे पहले एक और ट्वीट में मौर्या ने लिखा “मा. प्रधानमंत्री जी आप चुनाव के समय इन्हीं महिलाओं, आदिवासियों, दलितों, पिछड़ो को हिंदू कहते हैं. आरएसएस प्रमुख, भागवत जी कहते हैं कि जाति पंडितों ने बनाई. तो आखिर इन्हें नीच, अधम, प्रताड़ित, अपमानित करने वाली रामचरित्र मानस की आपत्तिजनक टिप्पड़ीयों को हटाने हेतु पहल क्यों नहीं.”

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर भी साधा निशाना

स्वामी प्रसाद मौर्या ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि अगर उन्होंने पंडितों को लेकर दिया बयान किसी मजबूरी में नहीं दिया है तो साहस दिखाते हुए रामचरितमानस से अपमानित करने वाली टिप्पणियों को हटवायें.
“जाति-व्यवस्था पंडितो (ब्राह्मणों) ने बनाई है, यह कहकर RSS प्रमुख श्री भागवत ने धर्म की आड़ में महिलाओं, आदिवासियों, दलितों व पिछड़ो को गाली देने वाले तथाकथित धर्म के ठेकेदारों व ढोंगियों की कलई खोल दी, कम से कम अब तो रामचरित्र मानस से आपत्तिजनक टिप्पड़ी हटाने के लिये आगे आयें।“
“यदि यह बयान मजबूरी का नहीं है तो साहस दिखाते हुए केंद्र सरकार को कहकर, रामचरितमानस से जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर नीच, अधम कहने तथा महिलाओं, आदिवासियों, दलितों व पिछड़ों को प्रताड़ित, अपमानित करने वाली टिप्पणियों को हटवायें। मात्र बयान देकर लीपापोती करने से बात बनने वाली नही है।“

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