मंगलवार को नोएडा में सातवें इंडियन वाटर वीक कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ. कार्यक्रम शुभारंभ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया. इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राज्यमंत्री बिेर तुडु, प्रहलाद सिंह पटेल समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे.
उत्तर प्रदेश में, विगत कुछ वर्षों में जल प्रबंधन के क्षेत्र में जो कार्य प्रारंभ हुए हैं, वे बहुत अच्छे परिणाम दे रहे हैं… pic.twitter.com/zwdaRHwqo7
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) November 1, 2022
प्रदेश में जल पर्याप्त मात्रा में मौजूद-सीएम योगी
सातवें इंडियन वाटर वीक कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जल संरक्षण के क्षेत्र में अपनी सरकार द्वारा किए गए कामों को बताया. मुख्यमंत्री ने कहा “आज प्रदेश में जल की कमी नहीं है. पर्याप्त मात्रा में जल मौजूद है क्योंकि हमारी सरकार ने 60 से ज्यादा नदियों को पुनर्जीवित करने का काम किया है. सीएम योगी ने कहा ये वो नदियां थीं जो लगभग लुप्त हो चुकीं थी. सिर्फ सेटेलाइट की तस्वीरों में ही इनका अस्तित्व बचा था. हमारे प्रयासों से आज ये नदियां फिर पानी से भरी सबके सामने हैं. सीएम ने कहा कि हमने प्रदेश में 2018 में प्लास्टिक बैन किया था इससे पहले ये प्लास्टिक नदियों में गिरता था. सीएम ने प्रदेश में चल रहे जल प्रबंधन के काम की चर्चा करते हुए कहा कि नमामि गंगे परियोजना का सबसे विकट हिस्सा कानपुर था. कानपुर में हर रोज़ 14 लाख लीटर सीवर गंगा में गिरता था, लेकिन नमामि गंगे योजना ने उन सीवर प्वाइंट को सैल्फी प्वाइंट बना दिया. सीएम योगी ने बताया की प्रदेश में इसी तर्ज़ पर गांवों में अमृत सरोवर योजना भी चलाई जा रही है. सीएम ने कहा कि नमामि गंगे परियोजना को जल संरक्षण कार्यों में एक आदर्श उदाहरण बताया.
आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने पूरे देश वासियों से ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ वर्ष के अवसर पर जल संरक्षण का आह्वान किया था… pic.twitter.com/C3qVrTNJ7d
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) November 1, 2022
बढ़ती आबादी से बिगड़ी नदियों और जलाशयों की हालत-राष्ट्रपति
इंडियन वाटर वीक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी अपने विचार रखे. राष्ट्रपति ने जल संसाधन की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “ बढ़ती आबादी के कारण हमारी नदियों और जलाशयों की हालत बिगड़ रही है. गांव के तालाब सूख रहे हैं और कई स्थानीय नदियां विलुप्त हो गई हैं. बढ़ती आबादी को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना आने वाले वर्षों में एक बड़ी चुनौती होगी पानी का मुद्दा बहुआयामी और जटिल है,जिसके लिए सभी हितकारकों को प्रयास करने चाहिए. हम सभी जानते हैं कि पानी सीमित है. ऐसे में उचित उपयोग और पुनर्चक्रण ही जल संसाधन को लंबे समय तक बनाए रख सकता है. इसलिए सभी को इस संसाधन का सावधानी पूर्वक उपभोग करने का प्रयास करना चाहिए”
राष्ट्रपति ने जल संरक्षण को अपनी नैतिकता का हिस्सा बनाने की अपील की. राष्ट्रपति ने कहा आम लोगों, किसानों, उद्योगपतियों और विशेषकर बच्चों पानी बचाने के लिए आगे आना चाहिए. राष्ट्रपति ने कहा कि हमें जल संरक्षण की दिशा में सार्थक कदम उठा, अपनी आने वाली पीढ़ी को एक बेहतर और सुरक्षित कल का तोहफा देने के बारे में सोचना होगा. उन्होंने याद दिलाया कि पानी के बिना जीवन की कल्पना करना असंभव है. राष्ट्पति ने कहा भारतीय सभ्यता में जल को जीवन में ही नहीं जीवन के बाद की यात्रा में भी महत्वपूर्ण माना गया है. हमारे यहां सभी जल स्रोतों को पवित्र माना जाता है. लेकिन आजकल बढ़ती आबादी के कारण स्थिति चिंताजनक हो गई है. हमारी नदियों और गांव के तालाब सूख रहे हैं. कई स्थानीय नदियां विलुप्त होने की कगार पर हैं.

