Saturday, July 4, 2026
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NCERT Controversy :’NCERT पर पाठ्यपुस्तकों के भगवाकरण के आरोप का एनसीआरटी निदेशक ने दिया जवाब..

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NCERT Controversy
NCERT Controversy

NCERT Controversy: भारत की राजनीति में लम्बे वक्त से विद्यालयों में दी जा रही शिक्षा पर सवाल उठाए जा रहे हैं. जिसमे ख़ास तौर पर इतिहास से जुड़े कुछ विषयों पर सवाल उठाये जाते रहे हैं. जैसी कि किताबों से मुग़लों की महिमामंडल से जुड़े कुछ अध्याय अक्सर विवादों का केंद्र बनते नज़र आये हैं. ख़ास तौर पर जब से बीजेपी सत्ता में आई है तब से ये विरोध और गहराता गया है. इसी कड़ी में NCERT से कुछ चैप्टर्स और कुछ टॉपिक्स को हटाया भी गया। जिसे लेकर और विवाद खड़ा हुआ.

NCERT Controversy : क्या है मामला ?

बता दें कि कक्षा 12 की हिस्ट्री साइंस की किताबों में बाबरी मस्जिद के जिक्र को हटाकर उसे ‘तीन गुंबद वाला ढांचा’ के रूप में प्रस्तुत किया गया है. इसके साथ ही नई किताब में सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या फैसले का भी उल्लेख किया गया है. एनसीईआरटी की किताब से बाबरी मस्जिद से जुड़े विषय को हटा दिया गया है.

टेक्स्ट बुक्स में परिवर्तन पर अब एनसीईआरटी(NCERT) के प्रमुख की तरफ से उनकी प्रतिक्रिया सामने आई है. एनसीईआरटी निदेशक दिनेश सकलानी ने कहा कि स्कूलों में बच्चों को इतिहास तथ्यों और जानकारी देने के लिए पढ़ाया जाता है, न कि इसे विद्यालयों को अखाड़ा या युद्ध का मैदान बनाने के लिए. किताबों और सिलेबस में बदलाव हर विषय के विशेषज्ञों की तरफ से किये गए हैंं. मैं प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करता हूं’.
वहीँ पाठ्यपुस्तकों में किये गए बदलावों को इतिहास का भगवाकरण करार देकर तथ्यों से छेड़छाड़ करने के आरोप भी लगाए गए लेकिन आरोपों का जवाब देते हुए NCERT निदेशक दिनेश सकलानी ने कहा कि पाठ्यक्रम का भगवाकरण करने का कोई प्रयास नहीं, पाठ्यपुस्तकों में सभी परिवर्तन साक्ष्य और तथ्यों पर आधारित है.

NCERT किताब में बदलावों पर दिनेश सकलानी का जवाब

NCERT प्रमुख ने किताबों में से गुजरात दंगों(Gujarat Riots ) और बाबरी मस्जिद(Babri Masjid) से संबंधित संदर्भों को हटाने पर कहा, ”हमें छात्रों को दंगों के बारे में क्यों पढ़ाना चाहिए, उद्देश्य हिंसक, अवसादग्रस्त नागरिक बनाना नहीं है.पाठ्यपुस्तकों में संशोधन एक वैश्विक प्रथा है, यह शिक्षा के हित में है.”

NCERT निदेशक ने किताबों से गुजरात दंगों-बाबरी मस्जिद विषयों को हटाने पर कहा, ”अगर कोई चीज अप्रासंगिक हो जाती है, तो उसे बदलना होगा. विद्यालयों में इतिहास तथ्यों से अवगत कराने के लिए पढ़ाया जाता है, न कि इसे युद्ध का मैदान बनाने के लिए. घृणा और हिंसा स्कूलों में पढ़ाने का विषय नहीं है, किताबों में संशोधन विषय विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है, मैं प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करता हूं.”