Monday, July 6, 2026
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Social media पर डीपफेक के मामले बढ़े,केंद्र सरकार ने जारी की एडवाइजरी

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Social media
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ब्यूरो रिपोर्ट, दिल्ली : जब से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल शुरू हुआ है.तब से फर्जी वीडियो बनाकर वायरल करने के मामले भी तेज़ी से बढ़ रहे हैं. कुछ टाइम से सोशल मीडिया Social media के जरिए गलत जानकारी फैलाने के मामले बढ़े हैं.पर घबराएं नहीं क्यूंकीब केंद्र सरकार ने इससे निपटने की तैयारी कर ली है.इसी कड़ी में मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ने सोशल मीडिया और अन्य इंटरमीडियरीज को एक एडवाइजरी जारी की है.एडवाइजरी में मौजूदा IT नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए कहा है.

Social media पर प्रतिबंधित कंटेंट के उल्लंघन पर होगी कार्यवाही

औपचारिक एडवाइजरी जारी करने की सूचना के बारे में स्टेट मिनिस्टर फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के राजीव चंद्रशेखर बताया.उन्होंने कहा ऐसे मामलों को बढ़ते हुए देख कर इसे लेकर एक औपचारिक एडवाइजरी जारी की गई है.इसमें एडवाइजरी के तहत उन प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई है जो यह सुनिश्चित करती हैं कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स रूल 3 (1) (b) के तहत प्रतिबंधित कंटेंट का उल्लंघन न करें.राजीव चंद्रशेखर ने कहा की अगर ऐसे उल्लंघनों की जानकारी या रिपोर्ट मिलती है तो कानून के तहत कार्यवाही की जाएगी.मिनिस्ट्री इन रूल्स के इंटरमीडियरीज की ओर से पालन की कड़ी निगरानी करेगी.

फ़ेसबुक और यू ट्यूब को केंद्र सरकार की चेतावनी

जाली वीडियो बनाकर और सोशल मीडिया के जरिए गलत जानकारी फैलाने के मामलें को लेकर इस एडवाइजरी में कहा गया है कि यूजर्स को उस कंटेंट की स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए जिसकी IT रूल्स के तहत अनुमति नहीं है.पिछले महीने सोशल मीडिया प्लेटफार्म और यू ट्यूब को डीपफेक्स को लेकर केंद्र सरकार ने चेतावनी दी थी.फेसबुक और यूट्यूब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यह बताया गया था कि देश के कानून के तहत डीपफेक्स और ऐसे कंटेंट पोस्ट करने पर प्रतिबंध है जो अश्लीलता या गलत जानकारी फैलाता है.

क्या है डीपफेक

डीपफेक से वीडियो और फोटो को बनाया जाता है. इसमें मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लिया जाता है.इसमें वीडियो और ऑडियो को टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर की मदद बनाया जाता है.किसी रियल वीडियो में दूसरे के चेहरे को फिट कर देने को डीपफेक नाम दिया गया है, जिसे आप लोग यकीन मान लेंगे.साधारण शब्दों में समझें, तो इस टेक्नोलॉजी में कोडर और डिकोडर टेक्नोलॉजी की मदद ली जाती है. डिकोडर सबसे पहले किसी इंसान के चेहरे को हावभाव और बनावट की गहन जांच करता है.इसके बाद किसी फर्जी फेस पर इसे लगाया जाता है.जिससे हुबहू फर्जी वीडियो और फोटो को बनाया जा सकता है.इन दिनों डीपफेक बनाने से जुड़े ऐप मार्केट में मौजूद हैं. जिनकी मदद से आसानी से डीफफेक वीडियो को बनाया जा सकता है.