Sunday, July 14, 2024

भव्य साज सज्जा के साथ भक्तों के स्वागत के लिए तैयार है महाकाल की नगरी उज्जैन नगरी

12 ज्योतिर्लिंगो में से एक महाकाल की नगरी उज्जैन में इस समय चारो तरफ अद्भुत छटा बिखरी हुई है. भव्य राजसी प्रवेश द्वार,108 नक्काशीदार स्तंभ,खूबसूरत गलियारों के साथ 856 करोड़ रुपये की लागत से बना उज्जैन का महाकाल मंदिर अपने भक्तों के स्वागत के लिए तैयार है.मंदिर के जीर्णोद्धार के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 अक्टूबर यानी मंगलवार को इसका उद्घाटन करेंगे.

 

मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकाल कॉरिडोर के विकास परियोजना का काम पूरा कर लिया गया है. महाकाल कॉरिडोर देखने में भव्य और मनमोहक बना है. इतना सुंदर की जैसे धरती पर स्वर्ग उतर आया है. 11 अक्टूबर को खुद प्रधानमंत्री महाकाल कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे. उसके बाद इसे आम भक्त जनता के लिए खोला जाएगा .उज्जैन महाकाल कॉरिडोर वाराणसी की तरह ही प्रधानमंत्री मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक है. जिसका पहल चरण पूरा हो गया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 अक्टूबर को उज्जैन का दौरा कर महाकाल लोक को लोगों को समर्पित करेंगे. इस दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी कैबिनेट के कई मंत्री भी मौजूद रहेंगे.

इस परियोजना के निर्माण को लेकर उज्जैन शहर और देश के लोग बहुत उत्साहित हैं. इस योजना के पूरा होने के साथ ही अब महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं को पहुंचने और पवित्र शिवलिंग के दर्शन करने में आसानी होगी. आसानी ही नहीं बल्कि अब महाकाल दर्शन का अनुभव भी कई गुना ज्यादा भव्य और मनोरम होने वाला है.

मध्य प्रदेश सरकार ने इस 900 मीटर से ज्यादा लंबे गलियारे का नाम ‘महाकाल लोक’ रखा है. जिसमें दो भव्य प्रवेश द्वार नंदी द्वार और पिनाकी द्वार गलियारे के शुरुआती स्थान के पास बनाए गए हैं, जो प्राचीन मंदिर के प्रवेश द्वार तक जाते हैं. इस रास्ते से गुजरने पर आपको स्वर्ग की अनुभूति होगा.यहाँ लगी एक-एक मूरत देखकर ऐसा लगेगा कि वह आपसे बातें कर रही है .

मंदिर में एंट्री को आसान और भव्य बनाने के लिए ओवरब्रिज के मुख्य प्रवेश द्वार को नंदी द्वार के सामने रखा गया है. यह लोगों के लिए पसंदीदा ‘सेल्फी प्वाइंट’ भी बन गया है. सेल्फी की दीवानगी पिछले कुछ सालों में लोगों के सर चढ़कर बोल रही है. इसे देखते हुए मंदिर को श्रद्धालुओं की आस्था और पर्यटन दोनों के हिसाब से बनाया गया ही. इतना ही नहीं पर्यटन को ध्यान में रखकर इस मंदिर को बेहद खूबसूरत ढंग से सजाया भी गया .

mahakal kamal

यहां रैंप की ढ़लान से देखने पर सजावटी त्रिशूल और भगवान शिव की मुद्रा वाले 108 अलंकृत बलुआ पत्थर के स्तंभ नज़र आते हैं. ये स्तंभ इतने खूबसूरत है कि एक नज़र में ही लोग इनकी ओर आकर्षित हो जाते हैं,साथ ही ये भगवान की मूर्तियों और जगमग होते चित्र के पास लगे फव्वारे इसकी सुंदरता को और भी ज्यादा निखार रहे हैं.

 

खास बात ये है कि ये मंदिर सिर्फ दिन में ही नहीं बल्कि रात में भी किसी अद्भुत महल से कम नहीं लगेगा.आलाम ये है कि अभी से ही हर दिन शाम ढलने के बाद काफी संख्या में लोग ओवरब्रिज के पास इक्का होकर प्राचीन रुद्र सागर झील को  देखते हैं और कॉरिडोर की पृष्ठभूमि में ‘सेल्फी’ लेते हैं.

 

इस भव्य कॉरिडोर को बनाने में कुल लागत 793 करोड़ रुपए आई है,जिसमें से निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने 271 करोड़ रुपए दिए थे, इसके अलावा 421 करोड़ रुपए मध्य प्रदेश सरकार ने दिए हैं.महाकाल कॉरिडोर को दो चरणों में बनाया गया है. यह कॉरिडोर अब पूरी तरह बन कर तैयार हो चुका है.11 अक्टूबर को पीएम मोदी खुद इसका उद्घाटन करेंगे.

 

कॉरिडोर में भगवान शिव और उनकी लीलाओं को दर्शाने के लिए कुल 199 मूर्तियां लगाई गई हैं . यहां एक-एक मूर्ति ऐसी है जिसे देखा कर आखें चौंधिया जाएं .

इस महाकाल कॉरिडोर को अस्तित्व में लाने के लिए काफी मेहनत और प्रयास लगे. जानकारी के मुताबिक 11 अक्टूबर को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महाकाल कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे तब यहां लेजर शो दिखाया जाएगा.इस मौके पर आतिशबाजी भी की जाएगी. इस कॉरिडोर के उद्घाटन से पहले कई बड़े बदलाव भी किये गए हैं.महाकाल कॉरिडोर में स्थानों में नाम अब अंग्रेजी में नहीं बल्कि हिंदी वैदिक आधार पर रखे जाएंगे .तो आइये आपको बताए हैं क्या होंगे वो नए नाम

इस कॉरिडोर में विजिटर फैसिलिटी सेण्टर को मानसरोवर कर दिया गया है . मिड वे जोन को मध्यांचल , कमर्शियल प्लाजा को त्रिवेणी मंडपम, लोटस मांड को कमल सरोवर, नाईट गार्डन को शांत वाटिका और कुछ क्षेत्र को त्रिपाद मंडपम ,भैरव मंडपम, डेक 1 को अवंतिका और डेक 2 को किश्किंधा नाम दिया गया है . महाकाल लोक पहुंचने के लिये चार भुजाओं वाले महाकाल ओवर ब्रिज से होकर त्रिवेणी संग्रहालय होते हुए रास्ता बनाया गया है.संग्रहालय के ठीक सामने लगभग 450 वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई है.पार्किंग शेड के ऊपर सोलर पैनल लगाये गये हैं.

महाकाल मंदिर से जुड़ी मान्यता

मध्यप्रदेश का उज्जैन नगरी तीर्थनगरी के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि यहां के राजा महाकाल हैं. यहां हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ के दर्शन के लिए आते हैं. उज्जैन का ये मंदिर पुण्य सलिला शिप्रा तट के पास मौजूद है और इसे 6ठी शताब्दी में बनाया गया था. ये तीर्थ बाबा भोलेनाथ के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और पूरी दुनिया में  बाबा महाकालेश्वर धामके नाम से जाना जाता है. कहा जाता है 12 ज्योतिर्लिंगों में से महाकाल ही एकमात्र सर्वोत्तम शिवलिंग है. कहते हैं कि ‘आकाशे तारकं लिगं पाताले हाटकेश्वरम्….भूलोके च महाकालो लिंड्गत्रय नमोस्तु ते।।’ अर्थात आकाश में तारक शिवलिंग, पाताल में हाटकेश्वर शिवलिंग तथा पृथ्वी पर महाकालेश्वर ही मान्य शिवलिंग है.

महाकाल के इस मंदिर में हर रोज भस्म आरती होती है. इस आरती की खासियत यह है कि इसमें ताजे चिता की भस्म से भगवान महाकाल का श्रृंगार किया जाता है. यहां आरती में शामिल होने के लिए पहले से बुकिंग कराना जरुरी है. पौराणिक कथा के मुताबिक इस शिवलिंग की स्थापना राजा चन्द्र सेन और गोप बालक रूप की कथा से जुड़ी है.कथा से हनुमान जी का संबंध भी जुड़ा हुआ है.

 

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