एक कहावत है जो गड्ढा आप दूसरों के लिए खोदोगे एक दिन उसमें आप खुद गिर जाओगे या आजकल फेमस karma returns या karma bites के बारे में तो आपने सुना होगा. ऐसा ही कुछ बीजेपी के एक नेता यशपाल बेनाम के साथ हो रहा है. खुद की फैलाई नफरत का ज़हर जब नेताजी को डसने लगा तो उन्हें याद आया कि ये 21वीं सदी है और यहां सबको अपने-अपने हिसाब से जीने का अधिकार है.
यशपाल बेनाम की बेटी की शादी केंसल
उत्तराखंड के बीजेपी नेता और पौड़ी गढ़वाल जिले के नगर पालिका अध्यक्ष यशपाल बेनाम को 28 मई को होने वाली अपनी बेटी की शादी रद्द करनी पड़ गई है. कई हिंदू संगठनों और संस्थाओं ने यशपाल बेनाम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था जिसके बाद उन्हें ये फैसला लेना पड़ा. असल में यशपाल बेनाम की बेटी की मुस्लिम लड़के से शादी होने वाली थी लेकिन अब शादी के सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं. हालांकि सूत्रों का कहना है कि पहले ही विशेष विवाह अधिनियम के तहत कोर्ट मैरेज हो चुका है. लेकिन परिवार की ओर से इस विषय पर कुछ भी नहीं कहा गया है.
खुद पर पड़ी तो याद आई फैसले लेने की आज़ादी
पालिकाध्यक्ष यशपाल बेनाम ने शादी कैंसल होने की बात बताते हुए कहा कि एक पिता होने के नाते बेटी की शादी का निमंत्रण कार्ड बहुत खुशी से छपवाया था लेकिन सोशल मीडिया पर शादी को लेकर कई तरह की टिप्पणियां होने लगी थीं. ऐसे में माहौल खराब होने का पूरा अंदेशा था. शादी में जो खुशनुमा माहौल होता है, वह नहीं बन पा रहा था. इतना ही नहीं यशपाल बेनाम ने शादी का विरोध करने वालों को तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, “किसी को ये नहीं भूलना चाहिए कि ये 21वीं सदी है. हमारे बच्चों को अपने फैसले लेने का पूरा अधिकार है.” यशपाल बेनाम यहीं नहीं रुके, उन्होंने अपनी पार्टी बीजेपी और नेताओं को निशाने पर लेते हुए कहा कि, “किसी को भी इसका विरोध नहीं करना चाहिए, जो लोग भी इसे धर्म के चश्मे से देख रहे हैं मैं उन लोगों से ये कहना चाहता हूं कि ये दोनों परिवारों के लिए बेहद अहम वक्त है. इस मामले में मेरे लिए धर्म ज्यादा अहम नहीं है.”
हिंदूवादी संगठनों से मिलने लगी थी ‘चेतावनियां’
असल में पौड़ी गढ़वाल जिले के नगर पालिका अध्यक्ष को, शादी के निमंत्रण पत्र के वायरल होने के बाद शादी रद्द करने की ‘चेतावनियां’ मिलने लगीं थी. एक धार्मिक नेता, स्वामी दर्शन भारती ने राज्य की राजधानी देहरादून में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान, जनता से बेनाम का बहिष्कार करने के लिए कहा. इस कार्यक्रम में स्वामी दर्शन भारती ने बताया कि बेनाम बेटी की शादी एक मुस्लिम से करके “लव जिहाद” का समर्थन कर रहे हैं. धार्मिक नेता दर्शन भारती ने कहा कि ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ का विरोध करने वाला पहला व्यक्ति बेनाम को होना चाहिए था लेकिन देखिए, कितनी बेशर्मी से वह मुसलमानों को ‘देवभूमि’ में आने और हमारी बेटियों से शादी करने के लिए कह रहे हैं. हद तो तब हो गई जब धार्मिक नेता ने वहां मौजूद लोगों से पूछा कि ” क्या रावत को सबक सिखाया जाना चाहिए, जिसके जवाब में मौजूद लोगों ने हाथ उठा के समर्थन किया.इसके बाद, धार्मिक नेता का भाषण और अधिक ‘नफरत’ से भर गया.
ऐसे ही कुछ एनजीओ ने भी शादी पर चिंता जताते हुए पौड़ी के जिलाधिकारी को ज्ञापन भी दिया. ईके नाम के एनजीओ ने तो अपने ज्ञापन में कहा कि, “इस तरह के अंतर-धार्मिक विवाह उत्तराखंड की भूमि की शांति को भंग करेंगे. हम आपसे यह सुनिश्चित करने का अनुरोध करते हैं कि अगर यह शादी होती है, तो भी रावत को ऐसा करने के लिए राज्य के बाहर जाना चाहिए.”
शादी रद्द पर प्रेमी जोड़े के मिलन की उम्मीद बरकरार
हफ्ता भर इस नफरत का सामना करने के बाद यशपाल बेनाम ने अपने हथियार डाल दिए और शादी तोड़ने का एलान कर दिया. उन्होंने कहा कि वह अपनी पार्टी और विपक्ष के कई बड़े नेताओं का नाम ले सकते हैं जिन्होंने अन्य समुदायों में बच्चों की शादी की और उसका कोई विरोध नहीं हुआ. लेकिन जब उन्होंने ऐसा करना चाहा तो उन्हें हर तरह के विरोध का सामना करना पड़ा. दुखी मन से बेनाम ने कहा कि, “व्यक्तिगत रूप से और सोशल मीडिया पर लोगों के आक्रोश के कारण, मुझे अपनी बेटी की शादी रद्द करनी पड़ी है. आगे की कार्रवाई तय करने के लिए वह जल्द ही अमेठी में दूल्हे के परिवार से मिलेंगे”
2019 में BJP के संगठन महामंत्री की भतीजी की शादी में नहीं हुआ था बवाल
वैसे यशपाल बेनाम की बात पूरी तरह गलत भी नहीं है. 2019 में भारतीय जनता पार्टी यानी BJP के संगठन महामंत्री रामलाल की भतीजी श्रेया गुप्ता की शादी फैजान करीम के साथ हुई थी. लखनऊ में हुई इस शादी में बीजेपी और आरएसएस के तमाम दिग्गज नेता शरीक हुए. वर-वधू को आशीर्वाद देने योगी सरकार के कई मंत्री, यूपी के राज्यपाल राम नाईक, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डॉ. दिनेश शर्मा, केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना, उड्डयन मंत्री नंद गोपाल नंदी समेत पार्टी के कई पदाधिकारी और दिग्गज पहुंचे थे.
2019 से 2023 में कितना बदल गया है देश
लेकिन यशपाल बेनाम ये भूल जाते हैं कि वो 2019 की बात थी. अब 2023 है. कश्मीर फाइल्स और द केरल स्टोरी जैसी फिल्मों ने नफरत की खाई को ज्वालामुखी के लावे से भर दिया है. अब तो आए दिन सोशल मीडिया पर हिजाब खींचने और होटलों और पार्कों में प्रेमी जोड़ों को पकड़ने पहुंचने वाले हिंदू संगठनों के गुंडों के वीडियो वायरल होते हैं.
ऐसे में अपनी बेटी की शादी दूसरे धर्म के लड़के से करने की सोचना ही बड़ी बात है. उसपर उन्होंने ये कैसे सोचा कि वो अपने इस कदम को समाज में स्वीकार करवा पाएंगे. भले ही शादी हिंदू रीति रिवाज से होनी थी. लेकिन कहते हैं न अपने बच्चों के प्यार में मां-बाप अंधे हो जाते हैं. शायद यशपाल बेनाम के साथ भी ऐसा ही हुआ. राज्य में मज़ार जिहाद के खिलाफ मुहिम चला रही अपनी पार्टी की राजनीति को वो अपने बच्ची के प्यार के आगे भूल बैठे और नतीजा जो हुआ वो आपके सामने है. वैसे शादी भले ही टली हो लेकिन उम्मीद बाकी है कि यशपाल बेनाम की बेटी अपना प्यार हासिल कर लेगी. यही उम्मीद देश के लिए भी है कि भले ही आज नफरत की आंधी तेज है लेकिन ये तूफान थमेगा ज़रूर और इसकी बर्बादी का जो मंजर लोगों को नज़र आएगा वो उनकी आंखें खोलने के लिए काफी होगा.
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