मौसम का यू-टर्न: 40 डिग्री के पार पहुंचे पारे से कल से मिलेगी राहत, तीन दिन के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी

बठिंडा | पंजाब में आसमान साफ होते ही धूप ने एक बार फिर अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है, जिससे तापमान में इजाफा दर्ज किया गया है। सोमवार को राज्य का पारा 40 डिग्री सेल्सियस की दहलीज को पार कर गया। बीते 24 घंटों में प्रदेश के औसतन अधिकतम तापमान में 2.9 डिग्री सेल्सियस की उछाल देखी गई है, हालांकि राहत की बात यह है कि यह अब भी सामान्य के मुकाबले 4.2 डिग्री सेल्सियस कम है। इस दौरान 40.2 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ बठिंडा राज्य का सबसे गर्म इलाका रहा।

बुधवार से बदलेगा मिजाज, तीन दिनों का 'ऑरेंज अलर्ट' जारी

मौसम वैज्ञानिकों के पूर्वानुमान के मुताबिक, चिलचिलाती धूप का यह दौर ज्यादा लंबा नहीं खिंचेगा और बुधवार से राज्य के मौसम में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा। मौसम विभाग ने आगामी तीन दिनों के लिए प्रदेश में 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। इस अवधि के दौरान पंजाब के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने और करीब 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ (तेज हवाएं) चलने की आशंका है। मौसम में आने वाले इस बदलाव की वजह से आने वाले दिनों में पारा 4 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क सकता है, जिससे लोगों को उमस और गर्मी से दोबारा राहत मिलेगी।

कई जिलों में हल्की बारिश के आसार, न्यूनतम पारे में भी बढ़ोतरी

सप्ताह के बाकी दिनों की बात करें तो पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, फाजिल्का, मुक्तसर, बठिंडा, रूपनगर और मोहाली जैसे क्षेत्रों में हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही 6 और 7 जून को भी पंजाब के कुछ हिस्सों में पानी गिरने का अनुमान है। तापमान के आंकड़ों को देखें तो राज्य के रात के तापमान (न्यूनतम तापमान) में भी 2.8 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है, जहां रूपनगर में सबसे कम 21.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। वहीं प्रमुख शहरों में अमृतसर का अधिकतम तापमान 36.3 डिग्री, लुधियाना और पटियाला का 35.6 डिग्री, पठानकोट का 37.4 डिग्री तथा फिरोजपुर का 36.7 डिग्री सेल्सियस मापा गया है।

धान की खेती के लिए अमृत बनी वर्षा, भूजल और बिजली की बची खपत

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के दिनों में हुई और आगे होने वाली मानसूनी फुहारें धान की बुवाई और फसल के लिए संजीवनी का काम कर रही हैं। इस प्राकृतिक वर्षा से खेतों में सिंचाई की आवश्यकता बेहद कम हो गई है, जिससे गिरते भूजल स्तर को सुधारने में बड़ी मदद मिल रही है। जानकारों का कहना है कि बारिश के पानी में घुली हुई नाइट्रोजन सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचती है, जिससे उनका विकास तेजी से होता है। इसके अतिरिक्त, मौसम ठंडा रहने और कृषि पंपों का इस्तेमाल कम होने के कारण राज्य में बिजली की मांग में भी भारी गिरावट आई है, जिससे पावर ग्रिड को बड़ी राहत मिली है।

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