Saturday, June 27, 2026
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क्या चंपत राय और अनिल मिश्रा ने नहीं दिया इस्तीफा? विहिप का बड़ा दावा, बढ़ता जा रहा है दबाव

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Champat Rai resignation
Champat Rai resignation

Champat Rai resignation: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और अनियमितताओं के मामले ने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में तहलका मचा रखा है. शुक्रवार को सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों में यह खबर तेजी से फैली कि ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है बाद में आई कुछ जानकारियों ने इस खबर पर सवालिया निशान लगा दिया.

विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने इस पर बड़ा बयान दिया. वीएचपी ने बताया कि कोोई इस्तीफा नहीं हुआ है. कम से कम उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है .

Champat Rai resignation :VHP ने दावों को किया खारिज,कहा’इस्तीफे की कोई जानकारी नहीं’

चंपत राय, जो कि ट्रस्ट के महासचिव होने के साथ-साथ विहिप के उपाध्यक्ष भी हैं, के इस्तीफे की खबरों पर विश्व हिन्दू परिषद ने तुरंत स्थिति स्पष्ट की। विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा,

“चंपत राय के इस्तीफे को लेकर हमारे पास कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।”

वहीं, विहिप के अध्यक्ष आलोक कुमार ने स्वीकार किया कि अयोध्या में विहिप के कुछ वरिष्ठ नेताओं की बैठक जरूर हुई थी, लेकिन उन्होंने इस बैठक में किसी भी तरह के इस्तीफे या फैसले की चर्चा से इनकार किया। ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव ने भी इस खबर को अफवाह बताते हुए एक समाचार चैनल से कहा, “ऐसा लगता है कि कुछ लोग तब तक शांत नहीं होंगे, जब तक उन्हें चंपत राय का इस्तीफा नहीं मिल जाता।”

वेबसाइट पर अब भी दर्ज हैं नाम

तमाम अटकलों और दावों के बीच, यदि ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ की आधिकारिक वेबसाइट को देखा जाए, तो वहां स्थिति जस की तस है। वेबसाइट पर अब भी चंपत राय का नाम ‘महासचिव’ और अनिल मिश्रा का नाम ‘ट्रस्टी’ के रूप में ही दर्ज है, जिससे यह साफ होता है कि आधिकारिक तौर पर कोई इस्तीफा स्वीकार या लागू नहीं हुआ है।

SIT रिपोर्ट के बाद बढ़ा दबाव, सीएम योगी की सख्त नीति

सूत्रों के मुताबिक, भले ही इस्तीफे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दोनों पदाधिकारियों पर पद छोड़ने का भारी दबाव है. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में की गई गंभीर सिफारिशों के बाद यह दबाव और बढ़ा हुआ है

अधिकारियों के अनुसार, छह दिनों की गहन जांच के बाद सौंपी गई एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले और गंभीर तथ्य सामने आए हैं. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की “जीरो टॉलरेंस” नीति और यह बयान कि ‘किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा’, ने ट्रस्ट के भीतर हलचल तेज कर दी है.

अब तक 8 आरोपी गिरफ्तार, जानिए क्या है पूरा टाइमलाइन

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई भी तेजी से आगे बढ़ रही है। इस पूरे विवाद का घटनाक्रम कुछ इस प्रकार है:

  • 7 जून: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं और चोरी का मुद्दा उठाकर इस विवाद की शुरुआत की.

  • 13 जून: मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी (SIT) का गठन किया.

  • 23 जून: एसआईटी ने महज छह दिनों की जांच के बाद अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी.

  • 25 जून: मामले में औपचारिक रूप से एफआईआर (FIR) दर्ज की गई.

  • 26 जून: अयोध्या पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एफआईआर में नामजद सभी 8 आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की.

राजनीतिक घमासान: विपक्ष ने साधा निशाना, गिरफ्तारी की मांग

इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है। विपक्षी दल सिर्फ इस्तीफे से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं।

  • कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला का बयान: कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केवल चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे से इस गंभीर समस्या का हल नहीं होने वाला है. मामले की तह तक जाना जरूरी है.

  • सपा नेता पवन पांडेय का हमला: समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडेय ने तीखा रुख अपनाते हुए कहा, “मैं इस कार्रवाई से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हूं। यह सिर्फ छोटे मोहरों को फंसाकर ‘मगरमच्छों’ को बचाने का प्रयास है। चंपत राय और अनिल मिश्र के संदर्भ में सिर्फ इस्तीफा काफी नहीं है, उनके खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए और उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए।”

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि गड़बड़ी बड़े स्तर पर हुई है। हालांकि चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की खबरें अभी तक आधिकारिक रूप से सच साबित नहीं हुई हैं, लेकिन योगी सरकार के कड़े रुख और विपक्ष के लगातार हमलों के बाद आने वाले दिनों में ट्रस्ट के भीतर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते है.