नशे के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पंजाब सरकार पर दबाव, गृहमंत्री भी उठ चुके हैं सवालों के घेरे में

चंडीगढ़। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हालिया पंजाब दौरों के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। पिछले चौबीस दिनों के भीतर दो बार पंजाब का दौरा कर चुके केंद्रीय गृहमंत्री ने नशा तस्करी के खिलाफ उठाए जाने वाले कदमों को लेकर प्रांतीय सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। शाह द्वारा उठाए गए इन गंभीर मुद्दों के बाद अब पंजाब भाजपा के नेताओं ने भी इस विषय को प्रमुख राजनीतिक हथियार बनाते हुए सरकार से तीखे सवाल पूछने शुरू कर दिए हैं, जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।

गृहमंत्री के तीखे सवाल और पीआईटी एनडीपीएस एक्ट का मुद्दा

अपने दौरों के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री ने सार्वजनिक मंचों से सवाल उठाया कि बड़े पैमाने पर नशा तस्करी की समस्या से जूझ रहे पंजाब में राज्य सरकार ने 'पीआईटी एनडीपीएस' (प्रिवेंशन ऑफ इलिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज) अधिनियम के तहत अब तक मामले क्यों दर्ज नहीं किए हैं। उन्होंने आंकड़े रखते हुए दावा किया कि देश के अन्य हिस्सों में इस कड़े कानून के तहत सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि पंजाब में इस प्रावधान के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। दूसरी ओर, पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने स्पष्ट किया है कि मार्च 2022 से अब तक एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत हजारों मामले दर्ज कर बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की गई हैं तथा नशा प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।

एनकोर्ड की बैठकें और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली

नशा तस्करी और उसके अवैध नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2016 में स्थापित 'नारको कोऑर्डिनेशन सेंटर' (एनकोर्ड) की बैठकों को लेकर भी गृहमंत्री ने कड़े सवाल किए हैं। केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने वाली इस चार-स्तरीय व्यवस्था के तहत होने वाली बैठकों और उनकी नियमितता को लेकर शाह ने प्रांतीय सरकार से जवाब मांगा है। आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भाजपा इस पूरे प्रकरण को एक बड़ा सियासी मुद्दा बनाने में जुटी है, जिससे यह साफ है कि राज्य में नशे के खिलाफ चल रही यह जंग आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ेगी।

Latest news

Related news