‘जय हो’ से गूंजा अटारी बॉर्डर, एआर रहमान ने बीटिंग द रिट्रीट समारोह में बांधा समा

अमृतसर। अटारी बॉर्डर पर स्थित जेसीपी (JCP) स्टेडियम में रविवार की शाम राष्ट्रभक्ति के रंग और गहरे हो गए। मशहूर संगीत सम्राट एआर रहमान ने जब अपने सदाबहार गीतों ‘मां तुझे सलाम’ और ‘जय हो’ के सुर बिखेरे, तो वहां मौजूद हजारों दर्शकों की आंखें नम हो गईं और पूरा माहौल देशभक्ति की भावना से सराबोर हो गया। जैसे ही संगीतकार ने मंच संभाला, पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट और वतनपरस्ती के गगनभेदी नारों से गुंजायमान हो उठा।

वीर जवानों के सम्मान में पहली बार लाइव परफॉर्मेंस

भारत-पाकिस्तान सीमा पर होने वाले पारंपरिक 'बीटिंग द रिट्रीट' समारोह के दौरान यह पहला मौका था जब संगीतकार एआर रहमान ने लाइव प्रस्तुति दी। आगामी फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' के निर्माताओं द्वारा आयोजित ‘जय हो- ए ट्रिब्यूट टू द ब्रेवहार्ट्स’ नामक यह खास शो पूरी तरह से देश के जांबाज सैनिकों और उनकी निस्वार्थ सेवा को समर्पित था। इस ऐतिहासिक पल के साक्षी सीमा सुरक्षा बल (BSF) के आला अधिकारी, जवान, स्थानीय निवासी और देश के कोने-कोने से आए सैलानी बने। रहमान के सुरों ने न केवल महफिल में समां बांधा, बल्कि सरहद पर दिन-रात मुस्तैद रहने वाले जवानों के प्रति देशवासियों के सम्मान को और बढ़ा दिया।

इंसानी रिश्तों और यादों का ऐतिहासिक दस्तावेज

समारोह का हिस्सा बने जाने-माने फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि अटारी बॉर्डर पर एआर रहमान का यह शो महज एक संगीतमय शाम नहीं है, बल्कि यह इतिहास, गहरी संवेदनाओं और इंसानी रिश्तों का एक अनूठा संगम है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि सरहदें जमीन को तो बांट सकती हैं, लेकिन दिलों के जुड़ाव, यादों और इंसानी जज्बातों को कभी जुदा नहीं कर सकतीं। उन्होंने बताया कि उनकी आने वाली फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' साल 1947 के देश विभाजन के दौर की त्रासदी, अपनों से बिछड़ने की टीस, उम्मीद की किरण और मानवीय संवेदनाओं के ताने-बाने पर बुनी गई है।

बीएसएफ के 60 साल और जांबाज सैनिकों को नमन

सीमा सुरक्षा बल (BSF) की स्थापना के गौरवशाली 60 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम की सराहना करते हुए इम्तियाज अली ने कहा कि मातृभूमि के रक्षकों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का यह सबसे बेहतरीन मंच है। उन्होंने कहा कि सीमा पर तैनात सैनिक हर विपरीत परिस्थिति और मौसम की परवाह किए बिना देश की संप्रभुता की रक्षा करते हैं, और पूरा राष्ट्र उनके इस अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान के लिए हमेशा उनका कर्जदार रहेगा। भारत-पाकिस्तान सीमा पर हुए इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व आयोजन की गूंज लंबे समय तक लोगों के दिलों में बनी रहेगी।

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