वोटर लिस्ट से नाम गायब होने पर क्या करें? दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया अहम सुझाव

नई दिल्ली। देश भर में एक तरफ जहां विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रभावित नागरिकों को एक बड़ी राहत प्रदान की है। मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान के दौरान जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कट गए थे, उनके लिए अब दोबारा नाम जुड़वाने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि जिन नागरिकों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, वे बिना किसी कानूनी कार्रवाई के भय के पुनः नामांकन हेतु आवेदन दाखिल कर सकते हैं।

फॉर्म-6 भरने और कानूनी कार्रवाई के भय पर कोर्ट का महत्वपूर्ण रुख

दरअसल, एसआईआर प्रक्रिया के दौरान पते में परिवर्तन या गणना प्रपत्र जमा न कर पाने के कारण हजारों मतदाताओं के नाम सूची से विलोपित कर दिए गए थे। प्रभावित नागरिकों में इस बात को लेकर गहरा भ्रम और डर व्याप्त था कि नया नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाला 'फॉर्म-6' मुख्य रूप से पहली बार मतदाता बनने वालों के लिए होता है, जिसमें पूर्व में नाम न होने की घोषणा करनी पड़ती है। मतदाताओं को यह आशंका थी कि पूर्व में मतदान कर चुके होने के कारण फॉर्म-6 भरने पर उन पर गलत जानकारी देने का आरोप लग सकता है। न्यायमूर्ति दिनेश मेहता और न्यायमूर्ति अदिति चौधरी की खंडपीठ ने इस आशंका को पूरी तरह से निराधार करार देते हुए कहा कि आवेदकों को किसी भी प्रकार की दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई से डरने की आवश्यकता नहीं है।

ऑनलाइन प्रक्रिया और नाम पुनर्जीवित करने का तरीका

उच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के प्रशासनिक तंत्र को भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी हो गए हैं। प्रभावित नागरिक निर्वाचन आयोग के आधिकारिक डिजिटल पोर्टल अथवा दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन माध्यम से फॉर्म-6 भरकर अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। अदालत ने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्राप्त आवेदनों का नियमानुसार और त्वरित गति से सत्यापन कर योग्य नागरिकों के नाम पुनः मतदाता सूची में शामिल किए जाएं।

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