Kolkata Durga Puja Pandal Stampede : कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में 17 अक्टूबर की शाम हुई भगदड़ ने पूरे पश्चिम बंगाल को झकझोर दिया है. 18 अक्टूबर को हुए इस हादसे में 19 लोगों की मौत हुई और 25 लोग घायल हुए हैं. घायलों को कोलकाता के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अस्पताल पहुंचकर घायलों और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की. राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की घोषणा की है. पुलिस ने आयोजकों और निजी सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सात लोगों को गिरफ्तार किया है.
मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है. घायलों को 5 लाख रुपये की सहायता और इलाज का पूरा खर्च उठाने की बात भी कही गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के परिजनों के लिए 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि घोषित की है.
हादसे के बाद चोरबागान पंडाल को आम लोगों के प्रवेश के लिए बंद कर दिया गया है. पुलिस सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, सुरक्षा व्यवस्था और उस समय की गई घोषणाओं की जांच कर रही है. इस बीच पूजा समिति के महासचिव और अन्य पदाधिकारियों के इस्तीफे की खबर भी सामने आई है.
12 साल तक पूजा संभालने वाले पूर्व महासचिव जयंत बनर्जी का बड़ा खुलासा
इस हादसे के बाद चोरबागान दुर्गा पूजा समिति के पूर्व महासचिव जयंत बनर्जी के बयान ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि इस साल पूजा की व्यवस्था संभालने वाली नई समिति में ऐसे लोग शामिल थे, जिनका चोरबागान से कोई खास संबंध नहीं था. उनके मुताबिक, पुरानी टीम के अनुभवी सदस्यों और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों को इस बार व्यवस्था संभालने का अवसर नहीं मिला.
जयंत बनर्जी ने बताया कि वह करीब 12 वर्षों से पूजा के आयोजन और भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालते रहे थे. उनके अनुसार, इस दौरान भारी भीड़ के बावजूद व्यवस्था संभालने के लिए प्रशिक्षित स्वयंसेवक मौजूद रहते थे. लेकिन इस बार पूजा से ठीक पहले उनसे इस्तीफा देने के लिए कहा गया, जबकि पंडाल की तैयारियां शुरू हो चुकी थीं.
पूर्व महासचिव ने इस बात पर सवाल उठाया कि जब हर साल दुर्गा पूजा के दौरान बारिश होती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, तो इस बार व्यवस्थाएं इस तरह क्यों बिगड़ गईं कि इतने लोगों की जान चली गई .
उनके आरोपों के मुताबिक, नई समिति और पुरानी टीम के बीच समन्वय की कमी ने व्यवस्था को प्रभावित किया हो सकता है. हालांकि, अभी यह जांच का विषय है कि हादसे के लिए किसकी जिम्मेदारी बनती है और क्या समिति में बदलाव का घटना से कोई सीधा संबंध था.
प्रशिक्षित वॉलंटियर्स को क्यों नहीं लगाया गया? भीड़ प्रबंधन पर सवाल
दुर्गा पूजा जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजन में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशिक्षित स्वयंसेवकों, पुलिस, सुरक्षा कर्मियों और आयोजन समिति के बीच तालमेल बेहद जरूरी होता है.
जयंत बनर्जी का कहना है कि पुरानी टीम के पास ऐसे स्वयंसेवक थे, जिन्हें पंडाल में आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ संभालने का अनुभव था. उन्होंने दावा किया कि इस बार इन लोगों को व्यवस्था में शामिल नहीं किया गया.
यह आरोप इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती रिपोर्टों में भीड़ के अत्यधिक दबाव, संकरी गलियों और अपर्याप्त नियंत्रण व्यवस्था की बात सामने आई है. घटना से एक दिन पहले पंडाल के पास बैरिकेडिंग टूटने और पुलिस के साथ भीड़ की धक्का-मुक्की के वीडियो भी सामने आये. जो किसी अनहोनी को न्योता दे रहे थे.
बारिश तो हर साल होती है, फिर इस बार कैसे बेकाबू हुए हालात?
जयंत बनर्जी ने अपने बयान में इस सवाल को प्रमुखता से उठाया कि दुर्गा पूजा के दौरान बारिश कोई असामान्य घटना नहीं है. वह वर्षों से आयोजन कर रहे थे और बारिश के बावजूद भीड़ को नियंत्रित करने का अनुभव रखते थे.
लेकिन 17 अक्टूबर की शाम हालात तेजी से बिगड़ गए. शुरुआती जानकारी के अनुसार, शाम करीब 7:30 से 7:40 बजे के बीच तेज बारिश के दौरान बड़ी संख्या में लोग पंडाल में प्रवेश करने या बारिश से बचने के लिए एक साथ आगे बढ़े. पहले से मौजूद भीड़ पर अतिरिक्त दबाव पड़ा और लोग संकरी जगह में फंसने लगे. कई लोग गिर पड़े, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई.
लाउडस्पीकर पर पंडाल गिरने की घोषणा से फैली दहशत?
हादसे की जांच में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है. शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, पंडाल में लाउडस्पीकर से ऐसी घोषणा की गई थी कि पंडाल की हालत खराब है और वह गिर सकता है, इसलिए लोग बाहर निकल जाएं. इस घोषणा से भीड़ में घबराहट फैलने और लोग एक साथ बाहर की ओर बढ़ने की आशंका जताई गई है.
पुलिस और जांच एजेंसियों को सीसीटीवी फुटेज, सार्वजनिक घोषणाओं की रिकॉर्डिंग और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर यह पता लगा रही है कि भगदड़ शुरू होने के ठीक पहले क्या हुआ था.
जगन्नाथ प्रतिमा हटाने और मां दुर्गा की मूर्ति को लेकर भी बोले पूर्व महासचिव
जयंत बनर्जी ने अपने बयान में क्लब परिसर में स्थापित भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा का भी जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि प्रतिमा को हटाने या तोड़ने की स्थिति बनी थी और उन्होंने उस समय इस पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने मां दुर्गा की प्रतिमा के पुराने स्थान और उसमें पहले हुई क्षति का भी उल्लेख किया.
चोरबागान हादसे से उठे पांच बड़े सवाल
इस घटना के बाद जांच एजेंसियों और प्रशासन के सामने कुछ अहम सवाल हैं:
भीड़ नियंत्रण में चूक कहां हुई? क्या पंडाल में प्रवेश करने वाले लोगों की संख्या नियंत्रित करने के पर्याप्त इंतजाम थे?
निकास मार्ग पर्याप्त थे या नहीं? संकरी गलियों में आपात स्थिति के दौरान लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था कैसी थी?
चेतावनी किसने दी? पंडाल गिरने संबंधी घोषणा किसने की और क्या उसके बाद भीड़ को सुरक्षित निकालने की योजना थी?
अनुभवी स्वयंसेवकों को क्यों नहीं लगाया गया? पूर्व महासचिव के आरोपों की जांच कर यह पता लगाना होगा कि इस साल आयोजन समिति में क्या बदलाव हुए थे।
पहले से मौजूद खतरे के संकेतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? हादसे से पहले बैरिकेडिंग टूटने और भीड़ के दबाव की खबरों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई थी या नहीं?
इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और किस स्तर पर लापरवाही हुई।

