नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की नई पुस्तक 'अपनापन' इन दिनों राजनीतिक गलियारों में भारी चर्चा का विषय बनी हुई है। इस पुस्तक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके तीन दशकों (30 साल) से भी ज्यादा पुराने आत्मीय संबंधों, खट्टे-मीठे अनुभवों और दोनों के बीच के गहरे जुड़ाव का बेहद भावुक वर्णन किया गया है। 26 मई को देश की राजधानी नई दिल्ली में विमोचित (लॉन्च) होने वाली इस किताब में साल 1991-92 की ऐतिहासिक एकता यात्रा से लेकर वर्ष 2025 तक के कई महत्वपूर्ण संस्मरणों को समेटा गया है। शिवराज सिंह चौहान ने अपनी किताब में एक बेहद दिलचस्प वाकये का जिक्र करते हुए लिखा है कि 13 दिसंबर 2023 को जब मध्य प्रदेश में मोहन यादव के मुख्यमंत्री पद का शपथ ग्रहण समारोह चल रहा था, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके पास आए थे। पीएम ने उनके कंधे पर हाथ रखकर धीरे से कहा था, "शिवराज, समय निकालकर दिल्ली आओ। आपसे कुछ जरूरी बातें करनी हैं।" इसके ठीक छह महीने बाद जून 2024 में जब उन्होंने केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली, तब जाकर उन्हें अहसास हुआ कि प्रधानमंत्री ने उसी दिन उनके भविष्य और दिल्ली की राजनीति के लिए योजना तैयार कर ली थी।
कैबिनेट बैठक का वो खुफिया सच और प्रधानमंत्री का कड़ा रुख
शिवराज सिंह चौहान ने अपनी इस पुस्तक में सुरक्षा और रणनीतिक फैसलों से जुड़े कई बड़े खुलासे भी किए हैं। किताब में अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम हमले के ठीक बाद बुलाई गई एक आपातकालीन कैबिनेट बैठक का विशेष रूप से जिक्र किया गया है। चौहान ने लिखा कि उस बेहद तनावपूर्ण और कठिन समय में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अद्भुत रूप से शांत, गंभीर और पूरी तरह से दृढ़निश्चयी नजर आ रहे थे। देश की सुरक्षा से जुड़े उस अहम मोड़ पर पीएम मोदी ने कैबिनेट के सामने बेहद स्पष्ट और कड़े शब्दों में कहा था कि इस बार देश का जो भी ऑपरेशन होगा, वह पुरानी सर्जिकल स्ट्राइक से बिल्कुल अलग और कहीं ज्यादा आक्रामक होगा। उन्होंने साफ चेतावनी दी थी कि इस कायराना हरकत के दोषियों को दुनिया के किसी भी कोने से ढूंढकर निकाला जाएगा और उन्हें ऐसी सजा दी जाएगी जिसे दुनिया याद रखेगी।
विपक्ष के हमलों के बीच प्रधानमंत्री का वो जादुई फोन कॉल
इसके अलावा, इस किताब में साल 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के समय का एक बेहद भावुक और निजी वाकया भी साझा किया गया है। चुनाव प्रचार के दौरान जब बीजेपी की शुरुआती उम्मीदवार सूचियों में शिवराज सिंह चौहान का नाम शामिल नहीं था, तब विपक्ष ने उनके एक पुराने बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया था। विपक्षी दलों ने चौतरफा यह भ्रामक प्रचार शुरू कर दिया था कि शिवराज का राजनीतिक करियर अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है। चौहान लिखते हैं कि इस मानसिक रूप से बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन मिलाया था। पीएम मोदी ने उन्हें 'मुख्यमंत्री' जैसे औपचारिक पद के बजाय बड़े भाई की तरह 'अपने शिवराज' कहकर पुकारा और बेहद गर्मजोशी से पूछा, "आप इतने चिंतित क्यों हो? कुछ समय के लिए एकांत में जाएं और अपने मन को पूरी तरह शांत रखें।"
ऋषिकेश की यात्रा और प्रधानमंत्री की गहरी दूरदर्शिता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस आत्मीय सलाह को मानकर शिवराज सिंह चौहान तुरंत उत्तराखंड में ऋषिकेश के पास गंगा मैया के किनारे कुछ समय बिताने के लिए चले गए, जिससे उनके मन को असीम शांति और संबल मिला। चौहान ने अपनी किताब में इस बात को रेखांकित किया है कि प्रधानमंत्री का यह स्नेह केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे उनकी एक गहरी रणनीतिक सोच भी काम कर रही थी। पीएम मोदी नहीं चाहते थे कि विपक्ष की भ्रामक और झूठी रिपोर्टों के जाल में फंसकर राज्य के लाखों कार्यकर्ताओं का मनोबल चुनाव के ऐन वक्त पर कमजोर पड़े। कुल मिलाकर, यह पुस्तक न केवल दोनों नेताओं के निजी रिश्तों को सामने लाती है, बल्कि एक बेहद संवेदनशील इंसान और कुशल रणनीतिकार के रूप में प्रधानमंत्री मोदी के बहुआयामी व्यक्तित्व को भी जनता के सामने बखूबी पेश करती है।

