नोटबंदी को गलत बताने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई. सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 2016 में दायर इन याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट ने सभी पक्षों को आदेश दिया है कि वो 2 दिन में लिखित दलील जमा करवा दें. असके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार और आरबीआई को भी आदेश दिया है कि वो नोटबंदी के फैसले से जुड़ी प्रक्रिया के सारे दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट को सौंप दें, हलांकि कोर्ट ने सरकार और आरबीआई को ये दस्तावेज़ सीलबंद लिफाफे में सौंपने की अनुमति दी है.
आपको बता दें 24 नवंबर को जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर की अध्यक्षता में 5 जजों की संविधान पीठ ने नोटबंदी मामले की विस्तृत सुनवाई शुरू की थी. जस्टिस नज़ीर के साथ संविधान पीठ में जो 4 अन्य जज थे वो हैं. – जस्टिस ए. एस. बोपन्ना, जस्टिस बी आर. गवई, बीवी नागरत्ना और वी. रामासुब्रमण्यम. जबकी याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से पी चिदंबरम और श्याम दीवान ने कोर्ट के सामने अपनी दलीलें पेश की. वहीं, कोर्ट के सामने केंद्र सरकार का पक्ष अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी ने रखा. जबकि रिज़र्व बैंक की ओर से वरिष्ठ वकील जयदीप गुप्ता ने बहस की.
6 साल बाद हुई मामले पर सुनवाई
8 नवंबर 2016 को केंद्र सरकार ने 500 और 1000 के पुराने नोटों को वापस लेने का फैसला किया था. सरकार ने इसे काले धन, आतंकवाद और भ्रष्टाचार पर बड़ी चोट बताया था. सरकार के इस फैसले के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में 58 याचिकाएं दाखिल हुई थीं. जिन्हें 16 दिसंबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट एक साथ कर 5 जजों की संविधान पीठ को भेज दिया था. तब सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के नोटबंदी फैसले पर रोक लगाने के साथ ही इस मामले में कोई भी अंतरिम आदेश देने से इनकार भी कर दिया था.