देश में बारिश का दौर पड़ेगा कमजोर, 2 सितंबर तक IMD का कम बारिश का पूर्वानुमान

नई दिल्ली। खेतों में खरीफ की फसलें तैयार होने के बावजूद मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मानसून के सुस्त पड़ने का अंदेशा जताया है। इससे धान समेत कई प्रमुख फसलों की पैदावार प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है, जिसने देश में संभावित सूखे और खाद्य संकट के साथ-साथ आर्थिक चुनौतियों को भी बढ़ा दिया है। आईएमडी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2 सितंबर तक देश भर में बारिश सामान्य से काफी कम रहने की संभावना है। शनिवार तक देश में मानसूनी वर्षा दीर्घकालिक औसत (एलपीए) से 14 प्रतिशत नीचे दर्ज की गई थी। मानसून ट्रफ रेखा के हिमालय की तराई में फंसे रहने की वजह से मध्य भारत में मानसूनी गतिविधियां ठहर गई हैं। इस स्थिति से रबी फसलों की बुआई के लिए आवश्यक मिट्टी की नमी पर भी बुरा असर पड़ने की आशंका है।

मध्य और प्रायद्वीपीय भारत में सूखे की मार, पूर्वोत्तर में भारी बारिश

पूर्वानुमान के अनुसार, जहां एक ओर हिमालयी क्षेत्रों, पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी वर्षा का दौर जारी रह सकता है, वहीं मध्य और प्रायद्वीपीय भारत में कृषि योग्य क्षेत्रों में बारिश न के बराबर रहने का अनुमान है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगस्त महीने में मानसून ट्रफ का दक्षिण की ओर न खिसकना कृषि प्रधान राज्यों के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है। इधर, निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट वेदर ने मानसून के अपने पूर्वानुमान में बड़ी कटौती करते हुए पूरे सीजन की बारिश एलपीए के मात्र 85 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जो पहले 94 प्रतिशत था। इसके साथ ही स्काईमेट ने देश में सूखे की 70 प्रतिशत संभावना जताई है।

अल नीनो का बढ़ता प्रभाव और फसलों पर बढ़ता संकट

सितंबर में स्थिति और बिगड़ने के पीछे अल नीनो के अत्यधिक मजबूत होने और कमजोर इंडियन ओशन डिपोल (आईओडी) को मुख्य वजह माना जा रहा है। वर्तमान में पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत में 26 फीसदी, दक्षिण प्रायद्वीप में 23 फीसदी और उत्तर-पश्चिम भारत में 11 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान और गुजरात जैसे वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों में इसका सबसे बुरा असर अरहर, सोयाबीन और मक्का की फसलों पर पड़ सकता है। मानसून की इस बेरुखी से आने वाले समय में खाद्य महंगाई दर में उछाल आने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

वैश्विक रसद संकट और भविष्य में भीषण गर्मी का अलर्ट

रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण पहले से ही वैश्विक आपूर्ति शृंखला और लॉजिस्टिक्स प्रभावित हैं, ऐसे में कमजोर मानसून भारत सरकार के सामने खाद्य प्रबंधन की बड़ी चुनौती खड़ी कर सकता है। वहीं, ब्रिटेन के मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि वर्तमान अल नीनो एक सदी का सबसे शक्तिशाली रूप ले सकता है। प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से 3 डिग्री सेल्सियस से अधिक ऊपर जाने का अनुमान है। वैज्ञानिकों ने सचेत किया है कि इस वैश्विक बदलाव के चलते वर्ष 2027 इतिहास का सबसे गर्म वर्ष दर्ज हो सकता है।

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