NEET Paper Leak नई दिल्ली : NEET (यूजी) परीक्षा में हुए कथित पेपर लीक और धांधली के विवाद ने देश की पूरी शिक्षा और परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस घटना से सबक लेते हुए केंद्र सरकार अब भविष्य में होने वाली सभी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित और ‘लीक-प्रूफ’ बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाने पर विचार कर रही है.
सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आगामी परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों (Question Papers) की सुरक्षित ढुलाई, रख-रखाव और संरक्षण की कमान भारतीय सेना (Indian Army) या अर्धसैनिक बलों को सौंपी जा सकती है.
NEET Paper Leak:लीक रोकने के लिए सरकार का ‘मिशन सिक्योर’
NEET विवाद के बाद छात्रों और अभिभावकों में बढ़े गुस्से को देखते हुए सरकार परीक्षाओं की विश्वसनीयता को हर हाल में बहाल करना चाहती है. माना जा रहा है कि प्रश्नपत्रों के छपने (Printing) से लेकर परीक्षा केंद्रों (Exam Centers) तक पहुँचने के बीच की कमान सेना के हाथों में सुरक्षित रहेगी, जिससे स्थानीय स्तर पर होने वाली किसी भी तरह की सेंधमारी या मिलीभगत की गुंजाइश खत्म हो जाएगी.
क्या है संभावित योजना?
सुरक्षित लॉजिस्टिक्स: प्रश्नपत्रों के बक्से सेना की निगरानी में विशेष वाहनों से परीक्षा केंद्रों के नजदीकी सुरक्षित ठिकानों (जैसे ट्रेजरी या सेना के बेस) तक पहुँचाए जाएंगे।
जीपीएस और हाई-टेक ट्रैकिंग: पूरे सफर के दौरान बक्सों की लाइव ट्रैकिंग होगी।
अंतिम समय पर डिलीवरी: परीक्षा के कुछ घंटे पहले ही कड़ी सुरक्षा के बीच पेपरों को परीक्षा हॉल तक डिलीवर किया जाएगा।
परीक्षा प्रणाली को सुधारने के लिए अब तक क्या हुआ?
-
अपडेट 1: कड़े कानून को मिली हरी झंडी केंद्र सरकार ने हाल ही में पेपर लीक और परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट’ लागू कर दिया है. इसके तहत दोषियों को 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.
-
अपडेट 2: हाई-लेवल कमेटी का गठन इसरो (ISRO) के पूर्व चेयरमैन डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है. यह कमेटी राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के कामकाज, डेटा सुरक्षा और परीक्षा के तौर-तरीकों में सुधार के लिए अपनी सिफारिशें सौंपेगी.
-
अपडेट 3: सेना को शामिल करने पर मंथन जारी सुरक्षा एजेंसियों और शिक्षा मंत्रालय के बीच इस बात को लेकर शुरुआती दौर की बातचीत शुरू हो चुकी है कि संवेदनशील परीक्षा सामग्री के परिवहन में सेना की मदद किस स्तर पर ली जा सकती है.
विश्वसनीयता बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती
लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहती. अगर प्रश्नपत्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सेना या अर्धसैनिक बलों को मिलती है, तो यह देश की परीक्षा प्रणाली के इतिहास में एक अभूतपूर्व बदलाव होगा. इससे न केवल माफियाओं के हौसले पस्त होंगे, बल्कि देश के युवाओं में परीक्षाओं के प्रति विश्वास फिर से मजबूत होगा.

