आफत बनी मानसूनी बारिश! कई राज्यों में बाढ़ और भूस्खलन, मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी

नई दिल्ली। पूरे देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के सक्रिय होने के साथ ही मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो गया है। विशेष रूप से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मानसून ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। इन पहाड़ी राज्यों में नदियों का जलस्तर बढ़ने, बाढ़ आने और लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत सहित देश के कई अन्य हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

पहाड़ी राज्यों में तबाही और जनजीवन पर संकट

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर और सोलन जिले खराब मौसम की चपेट में हैं, जहां कुल्लू में एक बुजुर्ग की मौत और कालका-शिमला हाईवे पर भूस्खलन के कारण कई लोगों के घायल होने की सूचना है। उत्तराखंड में स्थिति अधिक भयावह है, जहाँ यमुनोत्री और गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग सहित 118 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं। हरिद्वार में एक युवक की डूबने से मौत हो गई है और देहरादून सहित सात जिलों में भारी बारिश के चलते स्कूलों को बंद करना पड़ा है। वहीं, त्रिपुरा के भी कई जिले बाढ़ से प्रभावित हैं, जहाँ 11 हजार लोग बेघर हो गए हैं और हजारों मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।

विभिन्न राज्यों में मानसून का व्यापक असर

आईएमडी की रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, सिक्किम और पूर्वोत्तर के राज्यों में भी बीते 24 घंटों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है। इन क्षेत्रों के साथ ही देश के तटीय और दक्षिणी राज्यों में भी तेज हवाओं के साथ बारिश का दौर जारी है। केरल के वायनाड जिले में टनल प्रोजेक्ट साइट पर हुए भूस्खलन के बाद अब तक कुल सात शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि अन्य लोगों की तलाश के लिए राहत कार्य युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है।

पुणे में बचाव अभियान और रेल सेवा पर प्रभाव

महाराष्ट्र के पुणे में कूड़े के मलबे के नीचे दबी इमारत से आठ लोगों को निकालने का कार्य तीन दिन बाद भी जारी है। प्रशासन मलबा हटाकर लोगों तक पहुँचने की भरसक कोशिश कर रहा है। भारी भूस्खलन के कारण मुंबई-पुणे रेल मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुआ है। भोर घाट खंड में स्थिति सामान्य होने में समय लगने की संभावना को देखते हुए लंबी दूरी की 30 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

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