मुंबई। महाराष्ट्र में सुस्त पड़ी दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार एक बार फिर तेज हो गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, अगले 48 घंटों के भीतर मानसून देश की आर्थिक राजधानी मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई अन्य इलाकों में दस्तक दे सकता है। मौसम विभाग ने यह भी साफ किया है कि बीते सोमवार को मुंबई और उसके आस-पास के इलाकों में हुई झमाझम बारिश मुख्य मानसून की नहीं, बल्कि प्री-मानसून गतिविधियां थीं।
महाराष्ट्र में दोबारा सक्रिय हुआ मानसून
पिछले कुछ दिनों से मानसून की चाल धीमी होने के कारण लोगों को उमस का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन अब मौसम की परिस्थितियां पश्चिमी तट और मध्य भारत में मानसून के आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह अनुकूल हो चुकी हैं। हालांकि, राहत की इस खबर के बीच एक चिंताजनक आंकड़ा भी सामने आया है। देश के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश जरूर हुई है, लेकिन 22 जून तक पूरे देश में सामान्य से 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जो खेती-किसानी के लिहाज से एक बड़ी कमी है।
जून के अंत तक और तेज होगी रफ्तार
IMD के प्रमुख वैज्ञानिक ओपी श्रीजीत के अनुसार, पश्चिमी भारत में मानसूनी हवाएं एक बार फिर जोर पकड़ रही हैं। विभाग ने पहले ही अनुमान जताया था कि 22 और 23 जून के आस-आस मानसून दोबारा सक्रिय होगा, जो बिल्कुल सटीक साबित हो रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में बंगाल की खाड़ी में कोई निम्न दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) नहीं बना है, लेकिन जून के आखिरी सप्ताह तक इसके बनने की पूरी उम्मीद है। इसके बनते ही मानसूनी बारिश की रफ्तार और ज्यादा तेज हो जाएगी।
दिल्ली और यूपी में जुलाई के पहले हफ्ते तक पहुंचेगा मानसून
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में मजबूत सिस्टम न बनने के कारण उत्तर भारत के राज्यों में मानसून काफी देरी से चल रहा है। निजी मौसम एजेंसी स्काइमेट के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने बताया कि उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में मानसून अब जून के बजाय जुलाई के पहले सप्ताह में दस्तक दे सकता है। गौरतलब है कि दिल्ली में मानसून के आने की सामान्य तारीख 27 जून और मुंबई में 11 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार दोनों ही महानगरों में यह अपने तय समय से काफी लेट है।
देशभर में मानसून की स्थिति और एल नीनो का खतरा
मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की भारी कमी देखी जा रही है:
| क्षेत्र | बारिश में कमी (%) |
|---|---|
| मध्य भारत | 67% कमी |
| पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत | 40% कमी |
| दक्षिण भारत | 28% कमी |
| उत्तर-पश्चिम भारत | 15% कमी |
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस साल कुल मानसूनी बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) के करीब 90 प्रतिशत तक ही रह सकती है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि 'एल नीनो' का असर इस पूरे सीजन, विशेषकर मानसून के दूसरे चरण (अगस्त-सितंबर) में देखने को मिल सकता है, जिसके कारण देश के कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका बनी हुई है।

