पुरी। उड़ीसा के पवित्र धाम पुरी में आयोजित भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा के दौरान एक बेहद दुखद हादसा सामने आया है। महाप्रभु के दर्शन और रथ खींचने के लिए उमड़े लाखों श्रद्धालुओं के सैलाब के बीच अचानक भगदड़ और दम घुटने (सफोकेशन) जैसी स्थिति पैदा हो गई। इस दर्दनाक हादसे में दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई है, जबकि दम घुटने और बेहोश होने के कारण 150 से अधिक लोगों की तबीयत बिगड़ गई है, जिन्हें आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
भीड़ के बेकाबू होने से बिगड़े हालात और मची अफरा-तफरी
गुरुवार को आयोजित इस भव्य रथयात्रा में देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई थी। चिलचिलाती गर्मी, उमस और अत्यधिक भीड़ के कारण 'बड़ा डंडा' (ग्रैंड रोड) पर अचानक सांस लेने में कठिनाई जैसी स्थिति पैदा हो गई। देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई और वहां भगदड़ जैसी स्थिति बन गई, जिससे लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे और मुख्य मार्ग पर चारों तरफ चीख-पुकार मच गई।
अस्पतालों में आपातकाल घोषित और राहत कार्य तेजी से जारी
तबीयत बिगड़ने और चोटिल होने वाले सभी श्रद्धालुओं को तुरंत पुरी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल सहित नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में ले जाया गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार मरीजों का इलाज करने में जुटी हुई है। स्थानीय प्रशासन ने अस्पतालों में अतिरिक्त बेड और जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आपातकालीन कदम उठाए हैं ताकि भर्ती मरीजों को तुरंत बेहतर इलाज मिल सके।
प्रशासन के सुरक्षा दावों पर खड़े हुए गंभीर सवाल
सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा करीब 13,000 सुरक्षाकर्मियों और आला अधिकारियों की तैनाती का दावा किया गया था। इसके बावजूद इतनी बड़ी तादाद में लोगों के हताहत होने से प्रशासनिक इंतजामों पर सवाल खड़े होने लगे हैं। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रथ खींचने की शुरुआत होते ही भीड़ का दबाव अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गया, जिसे संभालना सुरक्षा बलों के लिए बेहद मुश्किल हो गया था।
राज्य सरकार ने लिया संज्ञान और जांच के दिए निर्देश
हादसे की सूचना मिलते ही राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। मुख्यमंत्री ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं। इसके साथ ही प्रशासन को घायलों के मुफ्त और समुचित इलाज के निर्देश दिए गए हैं। मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

