Supreme Court on Drug Trafficking नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ड्रग तस्करी के मामलों से निपटने के लिए समयबद्ध जांच और त्वरित सुनवाई की मांग वाली एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है. अदालत ने नशीली दवाओं के अवैध व्यापार को अत्यंत गंभीर समस्या करार देते हुए इसके खात्मे के लिए विभिन्न विशेषज्ञ एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल और समन्वित प्रयासों को बेहद जरूरी बताया है.
Supreme Court on Drug Trafficking: शीर्ष अदालत में मुख्य न्यायाधीश की पीठ की सुनवाई
यह अहम सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष हुई। याचिकाकर्ता एवं अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने अदालत का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि ड्रग्स से जुड़े मामलों में जांच और मुकदमों के निपटारे के लिए एक निश्चित समयसीमा तय की जानी चाहिए ताकि न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके.
याचिका में उठाए गए प्रमुख बिंदु और मांगें
इस याचिका में नशीले पदार्थों के नियंत्रण और तस्करी पर लगाम लगाने के लिए कई बड़े सुझाव और कानूनी कदम उठाने की मांग की गई है:
- विशेष अदालतें और फोरेंसिक समयसीमा: एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की तेज सुनवाई के लिए देश भर में विशेष अदालतों के गठन और फोरेंसिक रिपोर्ट समय पर सौंपने के लिए अनिवार्य डेडलाइन तय करने की मांग की गई है।
- डिजिटल रिकॉर्डिंग: तलाशी, जब्ती और मादक पदार्थों की सैंपलिंग जैसी पूरी प्रक्रिया की अनिवार्य रूप से डिजिटल वीडियोग्राफी और रिकॉर्डिंग किए जाने का अनुरोध किया गया है।
- संपत्ति जब्ती और सख्त कार्रवाई: संगठित ड्रग सिंडिकेट्स पर नकेल कसने के वास्ते तस्करों, उनके फाइनेंसरों और परिजनों की अवैध संपत्तियों की पहचान कर उन्हें समयबद्ध तरीके से जब्त करने की बात कही गई है।
- विशेषज्ञ समिति और पुनर्वास: नए साइकोएक्टिव पदार्थों की पहचान के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने, नशा पीड़ितों के लिए वेलनेस सेंटर खोलने और व्यक्तिगत इस्तेमाल के मामलों को बड़े तस्करों से अलग श्रेणी में रखने का सुझाव दिया गया है।

