नई दिल्ली|अब जर्मनी की यात्रा करने वाले भारतीय यात्रियों को ट्रांजिट वीजा की चिंता करने की जरूरत नहीं है। भारत आए जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने ऐलान किया है कि जर्मनी के एयरपोर्ट्स पर अब भारतीयों को ट्रांजिट वीजा नहीं लेना पड़ेगा। उन्होंने सोमवार को यह ऐलान किया। इसके साथ ही भारत और जर्मनी के बीच करीब 19 समझौते हुए हैं। मर्ज और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का संकल्प लिया है।
क्या होता है ट्रांजिट वीजा
ट्रांजिट वीजा का मतलब कम अवधि के एक परमिट है, जिसका इस्तेमाल यात्री किसी देश से गुजरने के दौरान करते हैं। उदाहरण के लिए जब यात्री अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए किसी देश में ले ओवर से गुजरते हैं। इस वीजा के लिए आगे की यात्रा के सबूत पेश करना होते हैं। साथ ही दस्तावेजों में भी यह दिखाया जाना जरूरी है कि आप उस देश में ज्यादा समय तक रुकने के मकसद से नहीं आए हैं।
भारतीयों के लिए क्या मायने
मर्ज की इस घोषणा के बाद जर्मनी के एयरपोर्ट होते हुए किसी अन्य देश में यात्रा करने वाले भारतीयों को ट्रांजिट वीजा नहीं लेना होगा। पहले भारतीय नागरिकों को यात्रा के दौरान शेंजेन ट्राजिट वीजा लेना पड़ता था। खास बात है कि यात्रियों को जर्मनी या शेंजेन इलाके में नहीं जाने की स्थिति में भी ट्रांजिट वीजा लेना पड़ता था।इस फैसले के बाद जर्मनी के जरिए यात्रा करने वाले भारतीयों की राह आसान हो जाएगी। हालांकि, जर्मनी जाने का मन बना रहे यात्रियों को अब भी टूरिस्ट, बिजनेस या स्टूडेंट आदि वीजा लेने की जरूरत होगी।
भारत और जर्मनी में समझौते
पीएम मोदी और चांसलर मर्ज के बीच हुई बातचीत के बाद, दोनों पक्षों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग के लिए एक रोडमैप और उच्च शिक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक रोडमैप सहित 19 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। दूरसंचार क्षेत्र में सहयोग को लेकर एक अलग समझौता भी किया गया। दोनों नेताओं ने समग्र व्यापार विस्तार के लिए भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने की वकालत की। इसके साथ ही, भारत और जर्मनी के लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने के लिए भारतीय पासपोर्ट धारकों के वास्ते जर्मनी से गुजरने के लिए वीजा-मुक्त पारगमन की घोषणा की गई।जर्मन नेता अपने साथ एक बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल को लेकर सोमवार सुबह अहमदाबाद पहुंचे। वह दो दिवसीय भारत यात्रा पर हैं। जर्मन चांसलर के रूप में एशिया की यह उनकी पहली यात्रा है।

