Tuesday, January 13, 2026

CP Radhakrishnan Oath: भारत के 15वें उपराष्ट्रपति बने सीपी राधाकृष्णन, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई शपथ

CP Radhakrishnan Oath: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन को पद की शपथ दिलाई.
राधाकृष्णन ने देश के उपराष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण किया, जो भारत में दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक प्राधिकारी है.

CP Radhakrishnan Oath: प्रधानमंत्री के साथ ही पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी थे मौजूद

शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह से लेकर पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनख़ड़, वैकेंया नायडू और हामिद अंसारी भी मौजूद रहे. पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की पद छोड़ने के बाद यह उनकी पहली सार्वजनिक उपस्थिति थी.

एनडीए उम्मीदवार राधाकृष्णन ने इंडिया ब्लॉक के बी सुदर्शन रेड्डी को हराया

एनडीए उम्मीदवार राधाकृष्णन मंगलवार को 452 वोटों के साथ भारत के 15वें उपराष्ट्रपति चुने गए. उन्होंने विपक्ष के उम्मीदवार और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी सुदर्शन रेड्डी को हराया, जिन्हें 300 वोट मिले.
हालांकि एनडीए को कागज़ पर 427 सांसदों का समर्थन प्राप्त था, लेकिन वाईएसआरसीपी के 11 सांसदों ने भी राधाकृष्णन को वोट दिया. दिलचस्प बात यह है कि एनडीए उम्मीदवार को 14 अतिरिक्त वोट मिले, जिससे विपक्षी खेमे में क्रॉस-वोटिंग की अटकलें तेज हो गईं.
परिणामों की घोषणा के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सी.पी. राधाकृष्णन को बधाई दी और आशा व्यक्त की कि नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति भारत के संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ करेंगे.

तानाशाह मत बन जाइयेगा- कांग्रेस

उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद सीपी राधाकृष्णन को कांग्रेस पार्टी की ओर से भी शुभकामनाएं दी गई थी. कांग्रेस ने नए उपराष्ट्रपति को शुभकामनाओं को साथ ही एक नसीहत भी दी. कांग्रेस पार्टी ने नये उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को पूर्व उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन की याद दिलाते हुए कहा कि उन्हें उनकी तरह ही कर्तव्य निभाने चाहिये. कांग्रेस ने कहा कि आप कर्तव्य निभाइयेगा, लेकिन तानाशाह मत बन जाइयेगा.
कांग्रेस पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ एक पर पोस्ट लिखा नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, जो राज्यसभा के सभापति भी होंगे, उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के प्रथम सभापति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के प्रेरक शब्दों को स्मरण कराया.
उन्होंने लिखा “6 मई, 1952 को राज्यसभा के उद्घाटन के अवसर पर डॉ. राधाकृष्णन ने कहा था, मैं किसी एक दल का नहीं हूं, और इसका अर्थ यह है कि मैं इस सदन के हर दल का हूं. मेरा प्रयास संसदीय लोकतंत्र की सर्वोच्च परंपराओं को बनाए रखना होगा और प्रत्येक दल के प्रति पूर्ण निष्पक्षता और समानता के साथ कार्य करना होगा , किसी के प्रति द्वेष नहीं. सभी के प्रति सद्भावना रखते हुए…यदि कोई लोकतंत्र विपक्षी समूहों को सरकार की नीतियों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और स्पष्ट आलोचना करने की अनुमति नहीं देता है, तो वह तानाशाही में बदल सकता है.”

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