जमुई। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक चर्चित वीडियो में दिख रहे दो शख्स जमुई में नाबालिग छात्रा से सरेराह बदसलूकी के मुख्य आरोपी हैं। नाबालिग के वीडियो को प्रसारित करने वालों पर कार्रवाई के दावों के बीच, अब इन गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े वीडियो भी चर्चा में हैं। दावा किया जा रहा था कि गोली से घायल आरोपी अगले दिन कोर्ट में पेशी के लिए पैदल चलता हुआ दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामले के तथ्यों की पड़ताल करने पर पुलिस द्वारा दी गई पूरी घटना की जानकारी सामने आती है।
सोशल मीडिया पर घिर गई बिहार पुलिस
जमुई में नाबालिग छात्रा से कथित बदसलूकी और उसका वीडियो प्रसारित होने के मामले में स्थानीय पुलिस की कार्रवाई अब सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बनी हुई है। विशेष रूप से मुख्य आरोपी नंदन यादव के पैर में गोली लगने की घटना पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि पैर में गोली लगने के बाद भी आरोपी सामान्य रूप से कैसे चल रहा था? वहीं कुछ लोग इसे दूसरे आरोपी हरेराम यादव से जोड़कर देख रहे हैं। दोनों के बारे में भ्रामक जानकारियां साझा होने से असमंजस की स्थिति बन गई।
तस्वीर में कौन नंदन और कौन हरेराम?
घटना से जुड़ी तस्वीरों में जो आरोपी चेहरे पर कपड़े का नकाब लगाए स्ट्रेचर पर लेटा हुआ है, वह नंदन यादव है। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी थी और इसकी औपचारिक सूचना जारी की गई थी। दूसरी ओर, जो व्यक्ति गमछे से चेहरा ढके हुए लाया जा रहा है, वह हरेराम यादव है। उसके खिलाफ इस तरह की किसी गोलीबारी की कोई औपचारिक जानकारी नहीं दी गई थी।
गोली की बात से कैसे मचा बवाल?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी हरेराम यादव प्रतापपुर गांव के बाहर कुंदर बराज के पास झाड़ियों में छिपा हुआ है। पुलिस टीम ने जब क्षेत्र की घेराबंदी की, तो हरेराम भागने का प्रयास करने लगा। इसी दौरान वह गिर पड़ा, जिससे उसके पैर में चोट आई। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर सदर अस्पताल पहुंचाया। पुलिस के मुताबिक उसके पैर में कोई गंभीर चोट नहीं थी, लेकिन सुरक्षा और स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए उसे उस तरीके से ले जाया गया।
जिसे गोली लगी, उसे स्ट्रेचर पर लाया गया
हिरासत में लिए गए हरेराम से पूछताछ के बाद पुलिस को नंदन यादव के ठिकाने का पता चला। बताए गए स्थान पर दबिश देने पहुंची पुलिस टीम का दावा है कि नंदन यादव ने देखते ही फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी और उसे गिरफ्तार कर इलाज के लिए लाया गया। नंदन यादव इस मामले का मुख्य आरोपी था, जिसे स्ट्रेचर पर लाया गया और वह चलने की स्थिति में नहीं था।
सोशल मीडिया पर दावों की असलियत
सोशल मीडिया पर दो अलग-अलग घटनाओं और व्यक्तियों के वीडियो को एक साथ जोड़कर भ्रम फैलाया गया। सवाल उठाया गया था कि एक दिन पहले घायल व्यक्ति अगले दिन पैदल कैसे चल सकता है। वास्तविकता यह है कि हरेराम को गोली नहीं लगी थी, बल्कि भागने के दौरान केवल मामूली चोट आई थी। इलाज के बाद जब उसे कोर्ट में पेश किया गया, तो वह चलने में सक्षम था। वहीं गोली लगने से घायल आरोपी नंदन यादव का इलाज जारी रहा।

