दमोह: कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई के दौरान उस वक्त एक अनोखा नज़ारा देखने को मिला, जब जमीनी विवादों और सरकारी योजनाओं की शिकायतों के बीच एक दिव्यांग बुजुर्ग अपनी अनोखी फरियाद लेकर पहुँचे। तेंदूखेड़ा के बमोरी गाँव के रहने वाले 50 वर्षीय नरेंद्र सिंह ठाकुर ने कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के समक्ष हाथ जोड़कर अपने जीवन की कड़वी सच्चाई रखी। उन्होंने अत्यंत भावुक होकर अधिकारियों से कहा कि अब उनसे अकेले नहीं रहा जाता, इसलिए उनका विवाह करवा दिया जाए और भोजन के लिए राशन का प्रबंध किया जाए।
अकेलेपन का दर्द और ईश्वर पर अटूट विश्वास
नरेंद्र सिंह अनाथ हैं और सुनने के साथ-साथ चलने-फिरने की समस्या से भी जूझ रहे हैं। वर्ष 2014 में अपनी पहली पत्नी के निधन के बाद से वे लगातार एकाकी जीवन बिता रहे हैं। जब प्रशासनिक अधिकारियों ने उनसे पूछा कि बिना रोजगार के वे गृहस्थी का खर्च कैसे उठाएंगे, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि जिस प्रकार भगवान पक्षियों और जीवों के दाने-पानी का इंतजाम करते हैं, वही ईश्वर उनके लिए भी जीवनसंगिनी की व्यवस्था करेंगे। उनका यह जवाब सुनकर जनसुनवाई में मौजूद हर व्यक्ति की आँखें नम हो गईं।
प्रशासन की त्वरित और संवेदनशील पहल
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने दिव्यांग बुजुर्ग की बातों को बेहद गंभीरता और आत्मीयता से सुना। उन्होंने तुरंत जिला अस्पताल के प्रबंधक डॉ. सुरेंद्र विक्रम सिंह को मौके पर बुलाकर नरेंद्र के मुफ्त इलाज व संपूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण के निर्देश दिए। इसके साथ ही, कलेक्टर ने अधिकारियों को नरेंद्र को नियमित राशन उपलब्ध कराने की दिशा में तत्काल जाँच कर आवश्यक कार्रवाई करने के आदेश जारी किए।
मानवीय संवेदना और सामाजिक सरोकार की मिसाल
यह मामला सिर्फ शादी की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में अकेलेपन, दिव्यांगता और गरीबी की मार झेल रहे व्यक्तियों की पीड़ा को उजागर करता है। जिला प्रशासन द्वारा दिखाई गई संवेदनशीलता ने यह साबित कर दिया कि जनसुनवाई केवल कागजी शिकायतों का निपटारा करने का मंच नहीं है, बल्कि यह असहाय और जरूरतमंद नागरिकों तक वास्तविक मदद पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम भी है।

