भोपाल। राजधानी भोपाल में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की सनसनीखेज हत्या के मामले में पुलिस गहनता से जांच कर रही है। लूटपाट के एंगल के साथ-साथ इस मामले को कॉन्ट्रेक्ट किलिंग (सुपारी हत्या) की दिशा से भी खंगाला जा रहा है। घटना के बाद से ही लाखों रुपये के जेवरात, नकदी और पूर्व अधिकारी का मोबाइल फोन लेकर फरार हुआ केयरटेकर वरुण कुमार अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
फरार केयरटेकर की तलाश और लोकेशंस
पंजाब के नाभा शहर का मूल निवासी आरोपी वरुण वारदात के बाद से लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि मंगलवार रात हत्या को अंजाम देने के बाद वह सबसे पहले बीना पहुंचा और वहां कुछ देर के लिए मृतक का मोबाइल फोन चालू किया था, जिसके बाद उसने उसे फिर बंद कर दिया। बीना के बाद वह उत्तर प्रदेश के आगरा चला गया, जहां उसका एक पुराना दोस्त रहता है। भोपाल पुलिस ने आगरा से आरोपी के उस दोस्त को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि वरुण अपनी मां के निधन के बाद से लोगों से दूरी बनाकर रहता था और किसी के ज्यादा संपर्क में नहीं था। पुलिस की कई विशेष टीमें उसकी सुरागकशी के लिए लगातार छापेमारी कर रही हैं।
एक करोड़ रुपये के वित्तीय विवाद का एंगल
इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड की जांच के दौरान पुलिस के सामने एक करोड़ रुपये के वित्तीय लेनदेन और धोखाधड़ी का बड़ा मामला उजागर हुआ है।
क्राइम ब्रांच में दर्ज कराई थी शिकायत: मृतक राकेश अग्रवाल ने करीब 11 महीने पहले अपने परिचित अजीत पाटनी के खिलाफ क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई थी।
ठगी और गिरफ्तारी: आरोपी अजीत पाटनी पर एक कंपनी में निवेश कराने और बेहतर रिटर्न का झांसा देकर किस्तों में करीब 1 करोड़ रुपये ठगने का आरोप था। इस मामले में पुलिस ने अक्तूबर 2025 में अजीत पाटनी को गिरफ्तार किया था, जो वर्तमान में अदालत में विचाराधीन है।
नए सिरे से पड़ताल: पुलिस अब कोर्ट में चल रही इस कार्यवाही, पूर्व आईएएस अधिकारी की संभावित गवाही और इस प्रकरण से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की नए सिरे से जांच कर रही है। इसके अलावा, मृतक के अन्य वित्तीय लेन-देन की कड़ियां भी जोड़ी जा रही हैं।

