अनूपपुर। अनूपपुर जिले की राजेंद्रग्राम जिला अदालत ने शहडोल की सांसद हिमाद्री सिंह और उनके पति नरेंद्र सिंह मरावी के बीच पारस्परिक सहमति से विवाह विच्छेद (तलाक) की डिक्री मंजूर कर ली है। दोनों का विवाह 23 नवंबर 2017 को हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुआ था, लेकिन आपसी मतभेदों के चलते वे पिछले करीब पांच वर्षों से अलग जीवन बिता रहे थे।
पारस्परिक सहमति से हुआ कानूनी अलगाव
न्यायालय में दी गई याचिका के अनुसार, शादी के बाद 20 जून 2019 को उनकी बेटी का जन्म हुआ था। इसके कुछ समय बाद से दोनों के बीच छोटे-छोटे मुद्दों पर विवाद बढ़ने लगे, जिसके कारण वे 5 मई 2021 से अलग रहने लगे थे। सांसद हिमाद्री सिंह ने अदालत को बताया कि अब साथ रहने की कोई गुंजाइश नहीं बची है। राहत की बात यह रही कि दोनों पक्षों ने कार्यवाही के दौरान एक-दूसरे पर कोई गंभीर आरोप नहीं लगाए और पूरी परिपक्वता के साथ आपसी सहमति से अलग होने का निर्णय लिया।
बेटी की कस्टडी और भरण-पोषण पर फैसला
अदालत के समक्ष तय समझौते के मुताबिक, उनकी बेटी गिरिशा का लालन-पालन मां हिमाद्री सिंह के पास ही होगा। सांसद स्वयं बेटी की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य के सभी खर्चों का वहन करेंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह भविष्य में अपने या अपनी बेटी के भरण-पोषण के लिए नरेंद्र सिंह मरावी से किसी प्रकार के गुजारे भत्ते की मांग नहीं करेंगी। इसके अलावा, विवाह के दौरान आदान-प्रदान किए गए उपहारों और आभूषणों को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच कोई विवाद नहीं है।
छह महीने की कूलिंग-ऑफ अवधि के बाद मिला फैसला
कानूनी प्रावधानों के तहत अदालत ने दोनों पक्षों को आपसी मतभेद भुलाकर पुनर्विचार करने के लिए छह महीने का समय (कूलिंग-ऑफ पीरियड) दिया था, जिसमें आपसी सुलह के प्रयास असफल रहे। अवधि पूरी होने पर जब दोनों ने अपना निर्णय नहीं बदला, तब अदालत ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13-बी के अंतर्गत तलाक की डिक्री पारित कर दी। अधिवक्ता विनोद सिंह बनाकर ने न्यायालय के इस आदेश की आधिकारिक पुष्टि की है।

