मंदसौर: मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा व्यवस्थाओं की अद्यतन स्थिति की गहन समीक्षा करने के उद्देश्य से जिला कलेक्टर दिव्यांक सिंह की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक के दौरान कलेक्टर ने जनपद में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और नवजात शिशुओं की मॉनिटरिंग को लेकर संबंधित अधिकारियों को बेहद सख्त और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
कलेक्टर ने विशेष तौर पर निर्देशित किया है कि जिले के भीतर जितने भी अति गंभीर कुपोषित बच्चे चिह्नित किए गए हैं, उनके स्वास्थ्य पर अत्यधिक संवेदनशीलता के साथ ध्यान दिया जाए। ऐसे सभी बच्चों को नजदीकी पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में तत्काल भर्ती कराया जाए और उनकी नियमित चिकित्सा देखभाल व खानपान सुनिश्चित किया जाए। जिला स्वास्थ्य समिति की इस समीक्षा बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर जोर
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य रूप से गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें बेहतर पोषण आहार उपलब्ध कराने और उनके शारीरिक विकास की निरंतर मॉनिटरिंग करने पर विचार-विमर्श हुआ, ताकि उन्हें शीघ्र ही पूरी तरह स्वस्थ किया जा सके। इसके साथ ही, गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए गर्भावस्था के पहले ट्राइमेस्टर में ही उनका अनिवार्य रूप से पंजीयन कराने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर ने कहा कि 'हाई रिस्क' (जोखिम भरी) श्रेणी की गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जानी चाहिए। इस प्रकार की महिलाओं की सूचियां स्वास्थ्य विभाग द्वारा तुरंत महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ साझा की जाएं। मैदानी स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे ऐसी हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की लगातार मॉनिटरिंग करें।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में ओपीडी बढ़ाने के निर्देश
बैठक के दौरान कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिले में संचालित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में ओपीडी (बाध्य रोगी विभाग) की संख्या में बढ़ोतरी की जाए, ताकि अधिक से अधिक लोगों को स्थानीय स्तर पर बेहतर चिकित्सा परामर्श मिल सके। इसके अतिरिक्त, आंगनवाड़ी केंद्रों के सुचारू संचालन, बच्चों को मिलने वाले नियमित पोषण आहार और जिले में एचआईवी (HIV) संक्रमित मरीजों के उपचार व व्यवस्थाओं की जानकारी लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
कोई भी महिला या शिशु स्वास्थ्य सेवाओं से न रहे वंचित
कलेक्टर ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताते हुए विशेष जोर दिया कि जिले का कोई भी नागरिक, विशेषकर गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चे, बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं और मॉनिटरिंग से वंचित नहीं रहने चाहिए। जो बच्चे अब तक किसी कारणवश नियमित टीकाकरण से छूट गए हैं, उन्हें तुरंत चिह्नित किया जाए और निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनका शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले को आपसी समन्वय स्थापित कर नियमित रूप से फील्ड विजिट करने के निर्देश दिए गए हैं।
बनाए जाएंगे कुपोषण 'हॉटस्पॉट', तैयार होगी कार्ययोजना
बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने कलेक्टर को अवगत कराया कि गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के मामलों को देखते हुए विशेष 'हॉटस्पॉट' चिह्नित किए गए हैं। जिन इलाकों या बस्तियों में तीन या उससे अधिक कुपोषित बच्चे पाए गए हैं, उन क्षेत्रों को हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है। इस पर कलेक्टर ने निर्देश दिए कि ऐसे सभी चिह्नित क्षेत्रों के बच्चों के त्वरित उपचार और पोषण स्तर को सुधारने के लिए एक प्रभावी कार्ययोजना तत्काल तैयार की जाए। साथ ही, आगामी 31 अगस्त तक 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों का आंगनवाड़ी केंद्रों में शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की हुई प्रगति समीक्षा
बैठक के अंत में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. आर.के. द्विवेदी ने जिले में संचालित विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं और अभियानों की अब तक की प्रगति रिपोर्ट कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत की। इन तमाम स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने सभी संबंधित अधिकारियों को तय समय-सीमा के भीतर अपने निर्धारित लक्ष्य शत-प्रतिशत पूर्ण करने के कड़े निर्देश दिए। इस उच्चस्तरीय बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख अधिकारी, विभिन्न ब्लॉकों के चिकित्सा अधिकारी (BMO) और आईCDS (ICDS) परियोजना के अधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

