भोपाल। मध्य प्रदेश में 'आयुष्मान भारत योजना' के अंतर्गत संबद्ध निजी एवं शासकीय अस्पतालों के लिए 1 अक्टूबर से नियामक और गुणवत्ता संबंधी नियम कड़े होने जा रहे हैं। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे प्रमुख शहरों में योजना के तहत उपचार उपलब्ध कराने वाले अस्पतालों के लिए राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (NABH) मान्यता और एंटी-लेबर मानकों को पूरा करना अनिवार्य होगा। तय समय-सीमा समाप्त होने के कारण भोपाल के 139 अस्पतालों सहित प्रदेश के करीब 289 अस्पतालों पर योजना से बाहर होने का संकट मंडरा रहा है।
1 अक्टूबर से NABH और एंटी-लेबर मानक अनिवार्य
स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पतालों को एनएबीएच (NABH) प्रमाणीकरण तथा एंटी-लेबर से जुड़े अनिवार्य नियमों को पूरा करने के लिए दी गई रियायत 1 अक्टूबर को समाप्त हो रही है। इस समय-सीमा के बाद केवल उन्हीं अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड के जरिए नि:शुल्क उपचार की सुविधा मिलेगी, जो इन उच्च गुणवत्ता मानकों को पूरा करेंगे। ऐसे में मरीजों को उपचार के लिए अस्पताल का चयन करते समय उसकी अद्यतन मान्यता और संबद्धता स्थिति की पुष्टि करने की सलाह दी गई है।
प्रदेश के 18 अस्पताल ब्लैकलिस्ट, 3.13 करोड़ रुपये का जुर्माना
योजना में अनियमितताओं, फर्जीवाड़े और नियमों की अनदेखी पर स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेशभर के 83 अस्पतालों में गंभीर खामियां पाए जाने और बार-बार चेतावनी के बावजूद सुधार न होने पर निम्नलिखित दंडात्मक कदम उठाए गए हैं:
डी-एम्पैनलमेंट व ब्लैकलिस्ट: 18 अस्पतालों की मान्यता पूरी तरह रद्द कर उन्हें काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में डाला गया है।
निलंबन (सस्पेंशन): 15 अस्पतालों की संबद्धता को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है।
आर्थिक दंड: 50 अस्पतालों पर कुल 3 करोड़ 13 लाख 79 हजार 311 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
भोपाल के 25 अस्पतालों पर कार्रवाई, 2 पर एफआईआर दर्ज
दंडात्मक कार्रवाई की जद में राजधानी भोपाल के 25 अस्पताल आए हैं, जिन पर कुल 2 करोड़ 11 लाख 91 हजार 492 रुपये की पेनल्टी लगाई गई है:
डी-एम्पैनलमेंट: 4 अस्पतालों की योजना से संबद्धता समाप्त की गई।
सस्पेंशन: 8 अस्पतालों को निलंबित किया गया।
जुर्माना: 13 अस्पतालों पर आर्थिक पेनल्टी अधिरोपित की गई।
आपराधिक मामला: वित्तीय हेराफेरी और गंभीर अनियमितताओं के चलते भोपाल के 2 अस्पतालों के प्रबंधकों के विरुद्ध पुलिस प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज कराई गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि योजना में पारदर्शिता और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित करने के लिए निगरानी अभियान आगे भी जारी रहेगा।

