Saturday, June 27, 2026
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सड़क और पुल के अभाव में दर्दनाक हालात, खटिया पर नदी पार करते समय महिला ने दिया बच्चे को जन्म

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छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के अमरवाड़ा विकासखंड से सरकारी विकास के दावों की जमीनी हकीकत बयां करती एक बेहद विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है। बुनियादी सुविधाओं की घोर कमी के चलते एक गर्भवती महिला को उफनती हुई नदी के तेज बहाव के बीच चारपाई (खटिया) पर लेटकर सफर तय करना पड़ा। कनेक्टिविटी और खराब रास्तों की वजह से समय पर आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा भी गांव तक नहीं पहुंच पाई, जिसके परिणामस्वरूप तड़पती महिला का रास्ते में ही प्रसव हो गया। इस गंभीर वाकये ने क्षेत्र की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और सड़क संपर्क के अभाव को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।

दशकों पुराना दर्द और उफनती नदी की मजबूरी

यह पूरा मामला क्षेत्र के लोहड़ी मोहल्ला (ग्राम हथोड़ा) का है, जहां लगभग 20 परिवारों का बसेरा है। इन ग्रामीणों को मुख्य सड़क मार्ग तक पहुंचने के लिए अनिवार्य रूप से एक स्थानीय नदी को पार करना पड़ता है। पिछले कई दशकों से यहां के निवासी शासन-प्रशासन से एक अदद पुल के निर्माण की गुहार लगा रहे हैं, परंतु विभागीय उदासीनता के चलते आज तक उनकी इस बुनियादी मांग को पूरा नहीं किया गया। वर्षा ऋतु के आते ही जब नदी का जलस्तर खतरे के निशान के पास पहुंच जाता है, तब इन ग्रामीणों की परेशानियां और जान का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

जांबाज युवाओं का हौसला और रास्ते में ही प्रसव

बीते बुधवार को मोहल्ले में रहने वाली एक गर्भवती महिला को अचानक तीव्र प्रसव पीड़ा शुरू हुई, जिसके बाद आशा कार्यकर्ता ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत 108 एम्बुलेंस को फोन किया। हालांकि, दुर्गम इलाका और खराब नेटवर्क कनेक्टिविटी होने के कारण एम्बुलेंस समय पर वहां नहीं पहुंच सकी। महिला की लगातार बिगड़ती नाजुक स्थिति को देख गांव के कुछ साहसी युवकों ने हिम्मत दिखाई और महिला को खटिया पर लिटाकर उफनती नदी पार कराने का साहसिक निर्णय लिया। जान की परवाह न करते हुए युवाओं ने पानी के तेज थपेड़ों के बीच चारपाई को संभाला, लेकिन इसी जद्दोजहद के दौरान रास्ते में ही महिला की डिलीवरी हो गई, जिसके बाद जच्चा-बच्चा को मोटरसाइकिल के जरिए जैसे-तैसे अस्पताल पहुंचाया गया।

जच्चा-बच्चा की कुशलक्षेम और ग्रामीणों का भारी आक्रोश

अमरवाड़ा के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. के. ठाकुर के अनुसार, घोघरा गांव के कंवारी मोहल्ले की रहने वाली सविता विश्वकर्मा को प्रसव के बाद चिकित्सालय लाया गया था, जहां प्राथमिक उपचार के बाद वर्तमान में मां और नवजात शिशु दोनों पूरी तरह सुरक्षित एवं स्वस्थ हैं। हालांकि, प्रशासनिक दस्तावेजों और स्थानीय लोगों के दावों में गांव के नाम को लेकर थोड़ा तकनीकी विरोधाभास है, लेकिन इस दर्दनाक जमीनी हकीकत को झुठलाया नहीं जा सकता। इस घटना के सार्वजनिक होने के बाद से ही पूरे अंचल के ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी और आक्रोश व्याप्त है। लोगों ने जनप्रतिनिधियों पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए मांग की है कि कागजी विकास से इतर यहां अविलंब पुल और पक्की सड़क का निर्माण शुरू कराया जाए ताकि भविष्य में किसी को ऐसे जानलेवा हालातों से न गुजरना पड़े।