हरियाणा राज्यसभा चुनाव में INLD ने मतदान से किया किनारा

Haryana Rajya Sabha Election ,चंडीगढ़ : हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए सुबह नौ बजे से मतदान शुरू हो गया है. सीएम नायब सिंह सैनी ने अपना वोट डाल दिया है. 11:20 बजे तक राज्यसभा चुनाव के लिए 25 वोट डाले गए हैं. मंत्री अनिल विज पैरों में फ्रेक्चर के कारण व्हीलचेयर पर वोट डालने पहुंचे. कांग्रेस विधायक विनेश फोगाट सांसद दीपेन्द्र सिंह हुड्डा और सतपाल ब्रह्मचारी के साथ विधानसभा पहुंची हैं. कांग्रेस के चार सांसद लगातार विधानसभा परिसर के बाहर डटे हुए हैं. विधायकों को साथ लेकर वोट डलवा रहे हैं.

Haryana Rajya Sabha Election : इनेलो विधायक नहीं करेंगे मतदान

वहीं इनेलो ने राज्यसभा चुनाव में वोट न करने का निर्णय लिया है. अभय चौटाला ने बताया कि उनके दोनों विधायक वोट नहीं करेंगे. कुल तीन उम्मीदवार भाजपा से संजय भाटिया, कांग्रेस से कर्मवीर बौद्ध और भाजपा समर्थित निर्दलीय सतीश नांदल मैदान में हैं. भाटिया की जीत तय मानी जा रही है. मुख्य मुकाबला बौद्ध और नांदल में है. कांग्रेस के एकमुश्त 37 वोट बौद्ध को मिले तो उनका जीतना भी पक्का है. हालांकि क्रॉस वोटिंग होने पर उनकी राह मुश्किल हो सकती है.

कांग्रेस विधायक कसाैली से रवाना

हरियाणा कांग्रेस के 31 विधायक कसाैली से चंडीगढ़ के लिए निकल गए हैं. साथ में प्रभारी बीके हरिप्रसाद, प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह, सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा भी हैं. सबसे पहले सभी विधायक नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सेक्टर 7 स्थित कोठी पर पहुंचेंगे. वहां ब्रेकफास्ट करने के बाद सभी विधायक राज्यसभा चुनाव में मतदान करने जाएंगे. मतदान केंद्र पर एआईसीसी की तरफ से नियुक्त पर्यवेक्षक भूपेंद्र सिंह हुड्डा और प्रभारी बीके हरिप्रसाद सभी विधायकों के मत पत्र की जांच करेंगे. कांग्रेस के 37 विधायक हैं, इनमें छह विधायक अपने निजी कारणों से हिमाचल नहीं गए थे.

पक्ष-विपक्ष के लिए प्रतिष्ठा का सवाल

राज्यसभा चुनाव सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए यह प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है. भाजपा के सामने चुनाव में इतिहास दोहराने का अवसर है. पार्टी पहले भी दोनों सीटों पर कब्जा बनाए हुए थी और इस बार भी राजनीतिक रणनीति के दम पर जीतने की तैयारी कर रही है. भाजपा का लक्ष्य केवल जीत हासिल करना ही नहीं है बल्कि यह दिखाना भी है कि विधानसभा चुनाव के बाद भी उसकी रणनीति न सिर्फ मजबूत बनी हुई है बल्कि विपक्ष के विधायकों पर भी उसकी पकड़ मजबूत है.दूसरी ओर कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश में रखा हुआ था ताकि वे एक साथ मतदान के लिए पहुंचे. कांग्रेस ने ऐसी किलेबंदी तैयार की है कि कोई भी विधायक सत्ता पक्ष के संपर्क में ना आ सके. कांग्रेस हाईकमान भी चुनाव के लिए पूरी तरह से सतर्क है और नजर बनाए हुए है.

हुड्डा की प्रतिष्ठा 

कर्मवीर जीतते हैं तो संदेश जाएगा कि कांग्रेस विधायकों पर हुड्डा की पकड़ मजबूत है. वे अपने नेतृत्व और संगठनात्मक प्रभाव को साबित कर सकेंगे.चुनाव हारते हैं तो विपक्ष और पार्टी के अंदर चर्चा तेज हो सकती है कि विधायकों पर हुड्डा का नियंत्रण कमजोर हुआ है. रोहतक को हुड्डा का राजनीतिक गढ़ माना जाता है. नांदल भी रोहतक से हैं और जाट बिरादरी से हैं. नांदल के चुनाव जीतने पर इसे हुड्डा के गढ़ में भाजपा की सेंध के रूप में देखा जाएगा.

सैनी की भी परीक्षा

मुख्यमंत्री बनने के बाद नायब सिंह सैनी की यह पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा है. दोनों सीटों जीतने पर राजनीतिक पकड़ और रणनीतिक क्षमता मजबूत मानी जाएगी. जीत मिलने पर पार्टी हाईकमान के सामने उनका कद और प्रभाव बढ़ सकता है.

विधानसभा में वोटों का गणित

कुल विधायक : 90
भाजपा : 48 विधायक
कांग्रेस : 37 विधायक
इनेलो : 2 विधायक
निर्दलीय विधायक : 3

जीत का गणित

एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 31 वोट चाहिए. भाजपा अपने 48 वोट के दम पर एक सीट आसानी से जीत सकती है. कांग्रेस के पास 37 वोट हैं इसलिए वह भी एक सीट जीतने की स्थिति में है. भाजपा के बचे 17 विधायक और तीन निर्दलीय वोट भी नांदल को वोट देंगे. यदि इनेलो के दो वोट भी नांदल को जाते हैं तो उन्हें 9 वोट और चाहिए होंगे. इन नौ वोटों को लेकर पूरा चुनाव दिलचस्प बना हुआ है.

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