बैंक फ्रॉड आरोपी को होटल में परिवार से मिलाने का मामला, दो पुलिसकर्मी समेत 5 गिरफ्तार

चंडीगढ़: हरियाणा और चंडीगढ़ के बहुचर्चित ₹661 करोड़ के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। इस बड़े आर्थिक अपराध के आरोप में जेल में बंद विचाराधीन कैदी विक्रम वाधवा को उपचार के बहाने अस्पताल ले जाया गया था। हालांकि, अस्पताल ले जाने की आड़ में एक सोची-समझी साजिश के तहत उसे सेक्टर-17 स्थित 'होटल सिटीहार्ट' में ले जाकर उसके परिजनों और अन्य करीबियों से गैर-कानूनी तरीके से मुलाकात करवाई गई।

खाकी पर गाज, सब-इंस्पेक्टर और एएसआई समेत पांच गिरफ्तार

कैदी को नियम विरुद्ध सुविधाएं मुहैया कराने और इस साजिश में शामिल होने के आरोप में पुलिस प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। सेक्टर-17 थाना पुलिस ने त्वरित कदम उठाते हुए सेक्टर-26 पुलिस लाइन में पदस्थ सब-इंस्पेक्टर जगमेहर और एएसआई सुरिंदर को गिरफ्तार कर लिया है। सुरक्षा में तैनात इन अधिकारियों पर अपने पद का दुरुपयोग करने और कैदी को अवैध रूप से निजी लाभ पहुँचाने का गंभीर आरोप है।

घोटालेबाज कैदी के दोनों बेटों पर भी कसा शिकंजा

अवैध मुलाकात की इस साजिश में केवल पुलिसकर्मी ही नहीं, बल्कि कैदी का परिवार भी बराबर का भागीदार पाया गया। पुलिस ने कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए विक्रम वाधवा के दोनों बेटों, करण वाधवा और कुणाल वाधवा को भी गिरफ्तार कर लिया है। मामले में पकड़े गए सभी पाँचों आरोपियों के खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया गया है तथा पुलिस उनसे गहन पूछताछ कर रही है।

अस्पताल के बहाने रची गई थी पूरी साजिश

पुलिस की प्रारंभिक पड़ताल में इस पूरे घटनाक्रम की परतें खुलकर सामने आई हैं। अरबों रुपये के वित्तीय फ्रॉड मामले में न्यायिक हिरासत में सजा काट रहे विक्रम वाधवा ने स्वास्थ्य खराब होने का बहाना बनाया था। अदालत से चिकित्सीय जांच की स्वीकृति मिलने के बाद नामजद पुलिसकर्मी उसे निजी गाड़ी में बैठाकर सेक्टर-16 के सरकारी अस्पताल ले गए थे, जहाँ से रास्ते में उसे निजी होटल ले जाकर अपनों से मुलाकात करवाई गई।

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