15 जुलाई से शुरू हो रही गुप्त नवरात्रि, जानें साधना, मंत्र जाप और पूजा का महत्व, बाधाओं से मिलेगी मुक्ति

सनातन धर्म नवरात्रि का विशेष महत्व होता है.साल में चार बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. जिसमें एक शारदीय नवरात्रि होती है दूसरा चैत्र नवरात्रि होती है और दो गुप्त नवरात्रि होती है. हिंदू पंचांग के अनुसार 15 जुलाई से आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के साथ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ होने जा रहा है. यह नौ दिनों तक चलने वाला विशेष पर्व साधना, उपासना और आत्मिक उन्नति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि में विशेष रूप से दस महाविद्याओं की पूजा-अर्चना और मंत्र साधना का विशेष महत्व होता है.इस दौरान श्रद्धालु मां भगवती की आराधना कर सुख, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं.

अनेक बाधाओं से मिलती है मुक्ति
अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम ने बताया कि एक वर्ष में कुल चार नवरात्रि आती हैं. इनमें दो नवरात्रि चैत्र और शारदीय सामान्य रूप से मनाई जाती हैं, जबकि आषाढ़ और माघ मास की नवरात्रि गुप्त नवरात्रि कहलाती है. गुप्त नवरात्रि मुख्य रूप से साधना, तंत्र उपासना और विशेष मंत्र सिद्धि के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है. यदि इन नौ दिनों में श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा-पाठ किया जाए तो जीवन की अनेक बाधाओं से मुक्ति मिलने की मान्यता है. उन्होंने कहा कि गुप्त नवरात्रि के दौरान कुछ विशेष धार्मिक उपाय भी किए जाते हैं, जिन्हें आस्था और विश्वास के साथ करने पर सकारात्मक फल मिलने की मान्यता है.

मूल मंत्रों का करें जाप
पंडित कल्कि राम के अनुसार, 15 जुलाई की रात से लगातार नौ दिनों तक सोने से पहले दो इलायची, दो काली मिर्च और दो लौंग रखकर सोना चाहिए यह क्रम पूरे नौ दिनों तक जारी रखें. दसवें दिन इन सभी वस्तुओं को किसी बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें. धार्मिक मान्यता है कि इस उपाय से आर्थिक परेशानियां, पारिवारिक क्लेश और स्वास्थ्य संबंधी बाधाओं से राहत मिलने के साथ सौभाग्य में वृद्धि होती है. गुप्त नवरात्रि में मां महालक्ष्मी अथवा दस महाविद्याओं के मूल मंत्रों का जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है. इन दिनों किया गया मंत्र जाप, तप और साधना विशेष फलदायी मानी जाती है. हालांकि उन्होंने श्रद्धालुओं को यह भी सलाह दी कि यदि कोई साधना या मंत्र जाप कर रहे हैं तो उसकी चर्चा किसी से न करें. गुप्त नवरात्रि का मूल भाव ही साधना की गोपनीयता है. जितनी अधिक गोपनीयता रखी जाएगी, उतनी ही साधना के सफल होने की मान्यता मानी जाती है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि आत्मिक शक्ति, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का पर्व है. इस दौरान श्रद्धालु नियम, संयम और भक्ति के साथ देवी आराधना कर अपने जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा की कामना करते हैं. बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन नौ दिनों में व्रत रखकर, मंत्र जाप, हवन और देवी पूजा के माध्यम से मां भगवती का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं.

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