मुंबई । अपने संघर्ष के दिनों और मां को खोने के दर्द को बयां करते हुए हाल ही में अभिनेता जैकी श्रॉफ युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने बताया कि कैसे जिंदगी में बड़े घर और सफलता पाने की दौड़ में अपनों के बीच दूरियों की दीवारें खड़ी हो जाती हैं। जैकी श्रॉफ ने आज की डिजिटल दुनिया और मोबाइल संस्कृति पर चिंता जताते हुए युवाओं को सीख दी है कि वर्चुअल दुनिया से बाहर निकलकर अपनों को वक्त दें और उनकी आंखों में झांककर उनके दिल का हाल जानें, क्योंकि यही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे अपनी मां, पिता, बेटे और दोस्तों की आंखों में आंखें डालकर बात करें। जैकी श्रॉफ ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे उनका परिवार तुर्कमेनिस्तान से मुंबई आया था और उनके शुरुआती दिन बेहद तंगहाली में बीते थे। उन्होंने बताया कि वे लोग एक बहुत छोटे से कमरे में रहते थे, जो आज के समय में बड़े लोगों के बाथरूम के आकार जितना रहा होगा। उस छोटे से घर में सब लोग एक साथ, बेहद करीब और प्यार से रहते थे। मां एक तरफ होती थीं, तो पिता दूसरी तरफ और जैकी खुद बीच में होते थे। वह तंग कमरा भले ही छोटा था, लेकिन उसमें प्यार और अपनापन कूट-कूट कर भरा था, और वह समय उनके लिए सबसे अनमोल था।
हर इंसान की तरह जैकी श्रॉफ का भी सपना था कि वे खूब पैसे कमाएं और अपने माता-पिता को एक बेहतर जिंदगी दें। उन्होंने मेहनत की, पैसे कमाए और एक बड़ा घर खरीदा। लेकिन इस बड़े घर के बनते ही जिंदगी में कुछ ऐसा बदल गया, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। जैकी श्रॉफ ने बेहद भावुक होकर बताया, मैंने सोचा था कि मां को पैसे कमा कर एक कमरा दूंगा और पापा को एक कमरा दूंगा। लेकिन जब बड़ा कमरा बनाया, तो उसके बीच में दीवार बन गई। एक रात उस दीवार के उस तरफ मेरी मां को हार्ट अटैक आ गया और हमें पता भी नहीं चला। इस घटना ने जैकी श्रॉफ की जिंदगी को अंदर से हिला कर रख दिया। उन्होंने नम आंखों से सवाल किया, आया क्या, गया क्या? समझ ही नहीं आया कि मैंने क्या पाया? मैंने बड़े कमरे तो ले लिए, लेकिन बीच में दीवारें आ गईं और मैं अपनी मां को खो बैठा। आज की डिजिटल दुनिया में युवा अपना ज्यादातर समय मोबाइल स्क्रीन और सोशल मीडिया पर बिताते हैं।
इसी बात पर चिंता जताते हुए जैकी श्रॉफ ने आज की पीढ़ी को एक बहुत बड़ी सलाह दी है। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे मोबाइल में सिर गड़ाए रहने के बजाय अपने परिवार के साथ वक्त बिताएं। जैकी ने कहा, जितना समय आप मोबाइल को देखते हैं, उतना समय अपनों को देखिए। हम तकनीक में इतने आगे बढ़ गए हैं कि अपनों के आमने-सामने बैठकर बात करना ही भूल गए हैं। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे अपनी मां, पिता, बेटे और दोस्तों की आंखों में आंखें डालकर बात करें। दिन में कम से कम 60 सेकंड (एक मिनट) निकालकर अपनों को ध्यान से देखें और समझें। जैकी श्रॉफ का यह संदेश साफ है कि जीवन में पैसा, बड़े घर और सफलता जरूरी हैं, लेकिन अपनों का साथ और उनके साथ बिताया गया समय उससे कहीं ज्यादा कीमती है।

